भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. ऑनलाइन सेवाओं से लेकर क्लाउड कंप्यूटिंग और बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म तक, हर जगह ज्यादा डेटा और बेहतर कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत महसूस की जा रही है. इसी बढ़ती मांग को देखते हुए अडानी ग्रुप और अमेरिकी कंपनी Jabil ने भारत में AI और डेटा सेंटर से जुड़े उपकरण बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है.
दोनों कंपनियों ने 13 अक्टूबर 2026 को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत भारत में 50:50 हिस्सेदारी वाला एक संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) बनाने का प्रस्ताव है. इस नई कंपनी का मुख्य काम AI और डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले हार्डवेयर का निर्माण और असेंबली करना होगा.
हालांकि, अभी इस साझेदारी को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है. इसे आगे बढ़ाने के लिए दोनों कंपनियों को विस्तृत समझौतों पर सहमति बनानी होगी. जरूरी मंजूरियां और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही संयुक्त उद्यम की स्थापना हो सकेगी.
AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भारत में तैयार होंगे जरूरी उपकरण
प्रस्तावित संयुक्त उद्यम के तहत AI रैक, सर्वर, स्टोरेज सिस्टम और नेटवर्किंग उपकरण बनाए जाएंगे. ये वही उपकरण हैं, जिनकी मदद से बड़े डेटा सेंटर काम करते हैं और AI से जुड़े भारी कंप्यूटिंग कार्य पूरे किए जाते हैं.
इसके अलावा, इन सिस्टम को लगातार चलाने के लिए जरूरी बिजली और कूलिंग से जुड़े उपकरण भी तैयार किए जाएंगे. इनमें पावर डिस्ट्रीब्यूशन यूनिट, ट्रांसफॉर्मर और लिक्विड कूलिंग सिस्टम जैसे उत्पाद शामिल हैं.
आसान भाषा में समझें तो AI को चलाने के लिए सिर्फ सॉफ्टवेयर या बेहतर एल्गोरिदम ही काफी नहीं हैं. इसके पीछे बड़ी संख्या में सर्वर, बिजली व्यवस्था और मशीनों को गर्म होने से बचाने वाले कूलिंग सिस्टम की भी जरूरत होती है. अडानी और Jabil की प्रस्तावित साझेदारी इसी पूरे ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान देगी.
कंपनियों का लक्ष्य कई गीगावॉट क्षमता वाले AI रैक के निर्माण का है. इसके साथ ही, उपकरणों की स्थापना और उन्हें चालू करने से जुड़ी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं.
2030 तक 5 से 8 GW तक पहुंच सकती है भारत की डेटा सेंटर क्षमता
भारत में डेटा सेंटर उद्योग के तेजी से बढ़ने की उम्मीद है. कंपनियों के अनुमान के मुताबिक, देश की डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक 5 से 8 गीगावॉट के बीच पहुंच सकती है. इसके पीछे AI का बढ़ता इस्तेमाल, क्लाउड सेवाओं का विस्तार और देश के भीतर डेटा रखने की जरूरत जैसे प्रमुख कारण हैं.
जैसे-जैसे लोग डिजिटल सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे और कंपनियां अपने काम में AI को शामिल करेंगी, वैसे-वैसे डेटा को स्टोर करने और प्रोसेस करने के लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग भी बढ़ेगी.
ऐसे में भारत में ही डेटा सेंटर के जरूरी उपकरण बनाने से घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है. साथ ही, यहां तैयार किए गए उत्पादों को दूसरे देशों में भी भेजने का रास्ता खुल सकता है.
दोनों कंपनियों का अनुमान है कि अगले सात वर्षों में वैश्विक स्तर पर AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बाजार में 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के अवसर मौजूद हो सकते हैं. यह आंकड़ा कंपनियों का अनुमान है, न कि पहले से तय कारोबार या कमाई.
अडानी ग्रुप की AI रणनीति को मिलेगा नया विस्तार
अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने कहा कि AI की क्रांति के लिए केवल नए एल्गोरिदम बनाना पर्याप्त नहीं होगा. इसके लिए ऊर्जा, बड़े डेटा सेंटर, आधुनिक कंप्यूटिंग और उन्नत विनिर्माण को एक साथ जोड़ना जरूरी है.
उनके मुताबिक, अडानी ग्रुप अब AI इंफ्रास्ट्रक्चर को बिजली उपलब्ध कराने और डेटा सेंटर चलाने तक सीमित नहीं रहना चाहता. कंपनी की योजना इस क्षेत्र में आगे बढ़कर जरूरी उपकरणों के इंजीनियरिंग और निर्माण में भी अपनी भूमिका मजबूत करने की है.
अडानी ग्रुप ने 2035 तक 5 GW क्षमता वाले, हरित ऊर्जा से संचालित और AI के लिए तैयार बड़े डेटा सेंटर विकसित करने के लिए 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. प्रस्तावित संयुक्त उद्यम इस व्यापक योजना में हार्डवेयर निर्माण की एक नई कड़ी जोड़ सकता है.
Jabil के अनुभव का मिलेगा फायदा
Jabil इंजीनियरिंग, सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में काम करने वाली वैश्विक कंपनी है. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने 36 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया था. कंपनी के पास करीब 60 वर्षों का इंजीनियरिंग और विनिर्माण अनुभव है तथा दुनिया भर में उसके 120 से अधिक स्थानों पर कामकाज का नेटवर्क है.
Jabil के CEO माइक डैस्टूर ने कहा कि भारत घरेलू और वैश्विक, दोनों तरह की AI इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को पूरा करने के लिहाज से महत्वपूर्ण बाजार बन सकता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अडानी ग्रुप के ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर अनुभव के साथ Jabil की विनिर्माण विशेषज्ञता को जोड़कर बड़े डेटा सेंटर ग्राहकों तक अपने समाधान पहुंचाए जा सकेंगे.
कंपनी ने डेटा सेंटर से जुड़ी अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए Hanley Energy Group और Mikros Technologies का भी अधिग्रहण किया है. Hanley Energy Group बिजली और ऊर्जा प्रबंधन से जुड़े समाधान उपलब्ध कराता है, जबकि Mikros Technologies हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम के लिए लिक्विड कूलिंग तकनीक पर काम करती है.
सरकारी नीतियों से भी मिल सकता है समर्थन
भारत में डेटा सेंटर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत माहौल भी अहम भूमिका निभा सकता है. डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, देश में व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचा उपलब्ध कराता है.
इसके अलावा, कंपनियों के अनुसार, केंद्रीय बजट 2026 में डेटा सेंटर के लिए 2047 तक घोषित टैक्स छूट भी इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित कर सकती है. हालांकि, इसका वास्तविक असर निवेश, नियमों और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
भारत में डेटा सेंटर से जुड़े उपकरणों का निर्माण बढ़ने से घरेलू आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने के अवसर बन सकते हैं. साथ ही, यदि उत्पादन क्षमता और लागत प्रतिस्पर्धी रहती है, तो भारतीय विनिर्माण इकाइयों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी जगह बनाने की संभावना होगी.
अडानी ग्रुप और Jabil के बीच यह समझौता फिलहाल एक प्रस्तावित साझेदारी का शुरुआती चरण है. जून 2026 में दोनों कंपनियों ने भारत में AI और डेटा सेंटर उपकरणों के निर्माण का इरादा जाहिर किया था. अब नए MoU के जरिए उस योजना को आगे बढ़ाने के लिए एक रूपरेखा तैयार की गई है.
आने वाले समय में इस परियोजना की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों कंपनियां अंतिम समझौते कब करती हैं, जरूरी मंजूरियां कैसे मिलती हैं और निर्माण से जुड़ी योजनाओं को किस तरह लागू किया जाता है.
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