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भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे बड़ी पेनल्टी के खिलाफ Apple पहुंची कोर्ट, हारी तो 3 लाख करोड़ से अधिक का भरना होगा जुर्माना

आईफोन निर्माता कंपनी (Apple) ने भारत के नए एंटीट्रस्ट पेनल्टी फ्रेमवर्क का कड़ा विरोध कर रही है और इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक अपील दायर किया है. एप्पल ने 2024 के  एंटी कंपटीशन कानून में किए गए संशोधन को चुनौती दी है.

Apple Penalty

आईफोन निर्माता कंपनी (Apple) ने भारत के नए एंटीट्रस्ट पेनल्टी फ्रेमवर्क का कड़ा विरोध कर रही है और इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक अपील दायर किया है. एप्पल ने 2024 के  एंटी कंपटीशन कानून में किए गए संशोधन को चुनौती दी है.

नया संशोधित कानून CCI (Company Competition Of India) जैसे रेगुलेटर्स को किसी कंपनी के ग्लोबल टर्नओवर के आधार पर जुर्माना लगाने की इजाज़त देता है. अगर नया नियम लागु होता है, तो iPhone बनाने वाली कंपनी पर 38 बिलियन डॉलर (लगभग 3.30 लाख करोड़)  तक का जुर्माना लग सकता है, जो भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में सबसे बड़ी पेनल्टी में से एक है और इसका भारत में आगे चलकर ग्लोबल टेक बड़ी कंपनियों के रेगुलेट होने के तरीके पर बड़ा असर पड़ सकता है. क्या है पूरा मामला?

Apple कानून में संशोधन का कर रही विरोध

एप्पल ने कोर्ट से भारत के एंटी कॉम्पिटिशन कानून में 2024 के बदलाव को “गैर-कानूनी” और “गैर-संवैधानिक” घोषित करने की मांग की है. पिछले साल आए नए संशोधित कानून के मुताबिक CCI अब किसी कंपनी के ग्लोबल टर्नओवर को आधार बनाकर उस पर जुर्माना लगा सकती है. पहले सिर्फ भारत के कारोबार को आधार बनाकर जुर्माना लगाया जाता था. हालांकि अभी तक एप्पल पर भर में कोई जुर्माना नहीं लगाया गया है.

कंपनी का कहना है कि इतना बड़ा पेनल्टी स्ट्रक्चर “साफ़ तौर पर मनमाना, गैर-संवैधानिक, बहुत ज़्यादा बेहिसाब, गलत” है, और घरेलू नियमों के उल्लंघन के हिसाब से कहीं ज़्यादा है. कंपनी को डर है कि इस नियम को लागू करने से तीन वित्तीय वर्ष में उसके एवरेज ग्लोबल टर्नओवर का 10 परसेंट तक फाइन लग सकता है, जो कि $38 बिलियन तक पहुंच सकता है.

बता दें कि यह मामला ऐसे समय सामने आया जब Apple के 2025 में स्मार्टफोन शिपमेंट में सैमसंग (Samsung) को हराने का अनुमान है.

इंडियन डेवलपर्स की शिकायत के बाद फंसी Apple

Apple की लीगल चुनौती 2022 में टिंडर (Tinder) के मालिक Match Group और कई भारतीय स्टार्टअप की शिकायतों के बाद शुरू की गई एक चल रही एंटीट्रस्ट जांच से जुड़ी है. इंडियन डेवलपर्स ने शिकायत की थी आईफोन यूजर्स ने ऐप्पल के ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड कर सकते है.

CCI की जांच में शुरुआती सबूत मिले कि Apple ने अपने iOS App Store पर थर्ड-पार्टी पेमेंट ऑप्शन को रोककर और इन-ऐप ट्रांज़ैक्शन पर 30 परसेंट तक कमीशन लेकर पावर का गलत इस्तेमाल किया था. हालांकि Apple ने यह दावा करते हुए कि कहा कि वह एक फेयर और सिक्योर प्लेटफॉर्म चलाता है और गुगल का एंड्रॉयड भारत के मोबाइल इकोसिस्टम में सबसे बड़ा प्लेयर बना हुआ है.

कंपनी का कहना है कि पेनल्टी जांच के तहत खास बिजनेस एक्टिविटी से होने वाले रेवेन्यू तक ही सीमित होनी चाहिए, न कि कंपनी के पूरे ग्लोबल ऑपरेशन तक.

पिछले 5 सालों में Apple का स्मार्टफोन बेस 4 गुना बढ़ा

हालांकि Apple का कहना है कि वह एंड्रॉयड की तुलना में भारत में अभी भी एक छोटा प्लेयर है, लेकिन डेटा इस दावे का समर्थन नहीं करता है. काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक, पिछले पांच सालों में भारत में Apple का स्मार्टफोन बेस चार गुना बढ़ गया है, जिसकी वजह लोकल मैन्युफैक्चरिंग का बढ़ना, मजबूत प्रीमियम डिमांड और घरेलू प्रोडक्शन के लिए सरकारी इंसेंटिव हैं.

कंपनी की अर्जी पर 3 दिसंबर को सुनवाई होगी और यह फैसला इस बात के लिए एक अहम मिसाल बन सकता है कि भारत मल्टीनेशनल कंपनियों के खिलाफ कॉम्पिटिशन लागू करने के मामले में कैसे काम करता है. अगर एप्पल हार जाता है, तो उसे कई अरब डॉलर का जुर्माना लग सकता है और भविष्य में दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल मार्केट में से एक में ग्लोबल टर्नओवर जुर्माने का नया पैमाना बन सकता है.


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-भारत एक्सप्रेस



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