Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

हॉस्टल के कमरे में बनाया ड्रोन, LinkedIn में सेना से मिला ऑर्डर; जानें कौन हैं दोनों लड़के?

हैदराबाद में BITS पिलानी के छात्रों ने कामिकेज ड्रोन बनाएं हैं. सबसे खास बात ये कि हॉस्टल रूम में बनाए यह ड्रोन सेना का पसंद आ गए हैं और आर्मी का ऑर्डर भी मिल गया है.

kamikaze drone indian army

ड्रोन बनाने वाले दोनों स्टूडेंट

हमारा भारत युवाओं के खान है. इस खान में तमाम हीरे छिपे हैं जो तमाम क्षेत्रों के साथ ही रक्षा के क्षेत्र में कमला कर रहे हैं और सेना की मदद के लिए नए अनुसंसाधन कर रहे हैं. हैदराबाद में BITS पिलानी कैंपस के दो इंजीनियरिंग छात्रों ने भारत के रक्षा क्षेत्र में हलचल मचा दी है. 20 साल के जयंत खत्री और शौर्य चौधरी ने ऐसा कमाल का ड्रोन बनाया है कि भारतीय सेना ने उन्हें ऑर्डर दिया है. उन्होंने Apollyon Dynamics नाम से स्टार्टअप शुरू किया है. आइये जानें इनके ड्रोन की खासियत और उनका सफर कैसा रहा?

राजस्थान के अजमेर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग छात्र जयंत खत्री और कोलकाता के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग छात्र सौर्य चौधरी इस ड्रोन को तैयार किया है. BITS पिलानी के हैदराबाद कैंपस कॉलेज के दो छात्रों ने हॉस्टल के कमरे में इस ड्रोन को तैयार किया है. इतना ही नहीं सेना को ऑर्डर देने के लिए इन्होंने लिंकडिं का प्रयोग किया है. जब ऑर्डर मिल गया तो छात्रों ने कंपनी बना ली और सेना को सेना को डिलीवरी भी देने लगे हैं.

ड्रोन की खासियतें

  • रफ्तार और पेलोड: 300 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ने वाले कामिकेज ड्रोन 1 किलो तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है.
  • रडार से बचाव: ये ड्रोन रडार से पकड़ में नहीं आते.
  • तेजी: सामान्य UAV की तुलना में 5 गुना तेज.
  • कस्टमाइजेशन: हर ड्रोन को भारत की भौगोलिक स्थिति के अनुसार कस्टमाइज किया गया है.
  • विविधता: बम गिराने और रेसिंग दोनों प्रकार के ड्रोन उपलब्ध हैं.

कैसे बनाया और सेना तक पहुंचाया गया?

सेना ने खरीद के बाद ड्रोन जम्मू, चंडी मंदिर (हरियाणा), पानागढ़ (पश्चिम बंगाल) और अरुणाचल प्रदेश में तैनात किए हैं. यहां की सैन्य यूनिट्स को सप्लाई के साथ इनकी कंपनी सैनिकों को ट्रेनिंग भी देती है. दोनों छात्रों का कहना है कि हम चाहते हैं हमारी सेना का विदेशों पर निर्भरता कम हो. इसी कारण हमने ड्रोन बनाने के लिए किसी तरह सेना से संपर्क किया और अधिकारियों को ट्रायल देने के बाद हमारा ड्रोन आर्मी को पसंद आ गया.

  • जयंत और शौर्य ने अपने प्रोफेसर संकेत गोयल के मार्गदर्शन में ऑफ-द-शेल्फ पुर्जों से ड्रोन बनाए.
  • उनमें खुद का सॉफ़्टवेयर और कंट्रोल सिस्टम इंस्टॉल किया.
  • LinkedIn पर आर्मी अधिकारियों को मैसेज कर संपर्क किया.
  • चंडीगढ़ में ड्रोन का डेमो देने के बाद सेना से ऑर्डर मिलने लगे.

स्टार्टअप की शुरुआत

मीडिया से बात करते हुए जयंत खत्री ने बताया कि मैंने बस सभी को ईमेल भेजना शुरू कर दिया था. सौभाग्य से एक कर्नल ने जवाब दिया और हमें डेमो के लिए चंडीगढ़ बुला लिया. हमने डेमो दिया और उन्हें ये पसंद आ गया. मानो इसके बाद तूफान आ गया. ऑर्डर आने लगे तो हमारी कंपनी का जन्म हुआ.

  • जयंत और शौर्य ने कॉलेज में एक डिफेंस-टेक क्लब से शुरू किया.
  • सेना से ऑर्डर मिलने पर उन्होंने Apollyon Dynamics रजिस्टर कराया और टीम बनानी शुरू की.
  • टीम में अब छह और सेकंड ईयर के छात्र शामिल हैं जो अलग-अलग प्रकार के ड्रोन प्लेटफॉर्म्स पर काम कर रहे हैं.
  • Apollyon Dynamics की टीम सेना के जवानों को ट्रेनिंग भी देती है.

सबसे बड़ी और खास बात ये कि छात्रों की उम्र महज 20 साल है. इस उम्र में उन्होंने सेना के इस्तेमाल का ड्रोन बना दिया है. इससे उनके ज्ञान का उपयोग तो हो रहा है. साथ ही सेना को स्वदेशी मदद मिल रही है. इतना ही नहीं उनका निर्माण भारत में नए प्रयोग और उनकी बढ़ती मांग को भी बता रहे हैं.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital