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Delhi: अडानी एंटरप्राइजेज के खिलाफ छप रही मानहानिकारक सामग्री पर कोर्ट ने लगाई रोक

Adani Enterprises Limited के खिलाफ मानहानिकारक सामग्री पर दिल्ली की कोर्ट ने रोक लगाई, पत्रकारों को सामग्री हटाने का आदेश दिया. अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी.

Adani Enterprises Ltd (AEL)
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Defamation Case of Adani Group: दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार, 6 सितंबर 2025 को अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) को बड़ी राहत देते हुए कुछ पत्रकारों और अन्य लोगों को कंपनी के खिलाफ असत्यापित मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने से रोक दिया. सीनियर सिविल जज अनुज कुमार सिंह ने एक अंतरिम आदेश में पत्रकारों और विदेशी एनजीओ से संबंधित व्यक्तियों को निर्देश दिया कि वे कंपनी के खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री को लेखों और सोशल मीडिया पोस्ट से हटाएं.

पोस्‍ट की गई थी मानहानिकारक सामग्री

AEL ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि paranjoy.in, adaniwatch.org और adanifiles.com.au जैसी वेबसाइटों पर समन्वित रूप से मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित की जा रही है. इसके साथ ही संबंधित पोस्ट और वीडियो कंपनी की प्रतिष्ठा को धूमिल करने और वैश्विक कारोबार को बाधित करने के इरादे से बनाए गए हैं. मामले में प्रतिवादी के रूप में पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता, रवि नायर, अभिर दासगुप्ता, अयस्कांत दास, आयुष जोशी, बॉब ब्राउन फाउंडेशन, ड्रीमस्केप नेटवर्क इंटरनेशनल, गेटअप लिमिटेड, डोमेन डायरेक्टर्स और अज्ञात व्यक्ति (जॉन डो) शामिल हैं.

याचिकाकर्ता के पक्ष में कोर्ट का फैसला

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला बनता है और निरंतर मानहानिकारक सामग्री का प्रकाशन कंपनी की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा सकता है. कोर्ट ने प्रतिवादियों को असत्यापित और मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने, वितरित करने या प्रसारित करने से रोक दिया. साथ ही, प्रतिवादियों को निर्देश दिया गया कि वे ऐसी सामग्री को पांच दिनों के भीतर हटाएं. यदि यह संभव नहीं हो, तो गूगल, यूट्यूब, X जैसे मध्यस्थों को 36 घंटों में सामग्री हटाने या अक्षम करने का आदेश दिया गया.

मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को

अदालत ने AEL को अतिरिक्त लिंक हटाने के लिए नोटिफाई करने की अनुमति दी. मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी. यह फैसला कॉरपोरेट प्रतिष्ठा की रक्षा और असत्यापित जानकारी के दुरुपयोग पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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