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Direct Tax Collection: देश में 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन, चालू वित्त वर्ष में 25 लाख करोड़ के पार पहुंचने का अनुमान

Direct Tax Collection: देश का प्रत्यक्ष कर संग्रह चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 26) में सात प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है और इसके 25 लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंचने का अनुमान है.

Direct Tax Collection: देश का प्रत्यक्ष कर संग्रह चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 26) में सात प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है और इसके 25 लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंचने का अनुमान है. यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी की ओर से सोमवार को दी गई.

इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर के साइडलाइन में बातचीत करते हुए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक आयकर संग्रह सरकार की ओर से निर्धारित किए गए लक्ष्य 25.20 लाख करोड़ रुपए पर पहुंचने की उम्मीद है. उन्होंने आगे कहा कि देश का प्रत्यक्ष कर संग्रह पिछले साल के मुकाबले 6.99 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है और यह काफी उत्साहजनक है.

देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह एक अप्रैल से लेकर 10 नवंबर की अवधि में पिछले साल के मुकाबले सालाना आधार पर 6.99 प्रतिशत बढ़कर 12.92 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है. इसकी वजह धीमा रिफंड और कॉरपोरेट टैक्स में जबरदस्त बढ़ोतरी है. 10 नवंबर तक रिफंड सालाना आधार पर 18 प्रतिशत कम होकर 2.42 लाख करोड़ रुपए हो गया है.

2024-25 के लिए ऑडिट रिटर्न जमा करने की समय सीमा बढ़ाई गईं

रवि अग्रवाल ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-2025 के लिए ऑडिट रिटर्न जमा करने की समय सीमा बढ़ा दी गई है और चालू वित्त वर्ष के लिए अभी भी दो अग्रिम कर किश्तें बकाया हैं. इससे पहले के सीबीडीटी के आंकड़ों के अनुसार, भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह इस वित्त वर्ष 17 सितंबर तक पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 9.18 प्रतिशत बढ़कर 10.82 लाख करोड़ रुपए को पार कर गया, जबकि रिफंड में 23.87 प्रतिशत की तेज गिरावट देखी गई थी.

इस दौरान गैर-कॉर्पोरेट कर राजस्व 13.67 प्रतिशत बढ़कर 5.83 लाख करोड़ रुपए हो गया. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शुद्ध कॉर्पोरेट कर संग्रह 4.93 प्रतिशत बढ़कर 4.72 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) 0.57 प्रतिशत की मामूली वृद्धि के साथ 26,305.72 करोड़ रुपए हो गया. सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 3.39 प्रतिशत बढ़कर 12.43 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि रिफंड 23.87 प्रतिशत घटकर 1.60 लाख करोड़ रुपए रह गया.


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-भारत एक्सप्रेस



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