Gautam Adani
Gautam Adani: गौतम अडानी के नेतृत्व में बिहार के मस्तीचक में एक बड़े ग्रामीण नेत्र चिकित्सा प्रोजेक्ट की शुरुआत की जा रही है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य गांवों और वंचित समुदायों तक सस्ती और बेहतर आंखों की चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है.
यह महत्वाकांक्षी परियोजना अडानी फाउंडेशन और अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल के संयुक्त सहयोग से तैयार की जा रही है. इस साझेदारी के जरिए उत्तर और मध्य भारत में नेत्र उपचार सुविधाओं को मजबूत करने, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और मेडिकल ट्रेनिंग को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा.
परियोजना पूरी होने के बाद मस्तीचक केंद्र दुनिया के सबसे बड़े ग्रामीण विजन केयर नेटवर्क में शामिल हो सकता है. यहां उपचार क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ दूरदराज इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों का मजबूत नेटवर्क तैयार करने की योजना है.
सेवा ही साधना है की सोच को बढ़ाती है पहल
यह पहल गौतम अडानी की ‘सेवा ही साधना है’ की सोच को आगे बढ़ाती है, जिसमें समाज सेवा को विकास का आधार माना गया है. यही विचार अडानी समूह की राष्ट्र निर्माण और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं में भी दिखाई देता है.
सामाजिक क्षेत्र में अडानी समूह की बढ़ती सक्रियता
पिछले कुछ वर्षों में Adani Group ने सामाजिक विकास और जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियों में अपनी भागीदारी तेजी से बढ़ाई है.
साल 2022 में अडानी परिवार ने स्वास्थ्य, शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के लिए 60 हजार करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी. बाद में सामाजिक योजनाओं को और विस्तार देने के लिए अतिरिक्त 10 हजार करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता भी जताई गई.
समूह ने कई बड़े जनसेवा अभियानों में भी योगदान दिया है. प्रयागराज महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की सहायता से लेकर पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा में मुफ्त भोजन वितरण जैसी पहलें इसका हिस्सा रही हैं.
साल 2005 से स्थापित है अस्पताल
2005 में स्थापित अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल आज देश के प्रमुख नेत्र चिकित्सा संस्थानों में गिना जाता है. अस्पताल अब तक 14 लाख से ज्यादा सर्जरी कर चुका है और ग्रामीण इलाकों में अंधत्व रोकने के लिए बड़े पैमाने पर जांच अभियान चला चुका है.
यह प्रोजेक्ट अडानी फाउंडेशन के विजन केयर प्रोग्राम को भी मजबूती देगा, जिसकी शुरुआत 2024 में की गई थी. इस कार्यक्रम के तहत अब तक 11 राज्यों में करीब 1.93 लाख लोगों की आंखों की जांच की जा चुकी है और 59 हजार से अधिक लोगों को चश्मे उपलब्ध कराए गए हैं.
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माना जा रहा है कि इस नई पहल से ग्रामीण भारत में आंखों की चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच काफी बेहतर होगी और सामाजिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी.
-भारत एक्सप्रेस
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