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2030 तक साढ़े तीन गुना बढ़ेगा भारत का REITs-InvITs बाजार, विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी

REITs in India: नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत का REITs और InvITs बाजार 3.5 गुना तक बढ़ सकता है. स्थिर रिटर्न और विदेशी निवेश से तेजी मिलेगी.

REITs in India

भारत में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) का बाजार आने वाले वर्षों में तेज़ी से बढ़ने वाला है. नाइट फ्रैंक इंडिया (Knight Frank India) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक इन दोनों निवेश साधनों का आकार मौजूदा स्तर से करीब साढ़े तीन गुना तक पहुँच सकता है. इसके पीछे वजह है ऑफिस स्पेस की बढ़ती आपूर्ति, निवेश पर स्थिर रिटर्न और घरेलू व विदेशी संस्थागत निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी.

नाइट फ्रैंक इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (गवर्नमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी) राजीव विजय का कहना है कि InvITs आज निवेशकों के लिए उच्च रिटर्न देने वाला विकल्प बनकर उभर रहे हैं. उनके मुताबिक, ‘REITs और InvITs दरअसल यील्ड स्ट्रक्चर की तरह काम करते हैं, जहां निवेशक को 6-8% तक की नियमित आय मिलती है. इसके अलावा 4-8% तक अतिरिक्त वृद्धि की संभावना रहती है. यानी कुल मिलाकर 12-16% तक का स्थिर रिटर्न मिल सकता है. यही वजह है कि विदेशी पूंजी इन साधनों में बड़े पैमाने पर आई है.’

म्यूचुअल फंड जैसा सफर

विजय का मानना है कि इस समय REITs और InvITs उसी मुकाम पर खड़े हैं, जहां भारत का म्यूचुअल फंड उद्योग 5-7 साल पहले था. उन्होंने कहा, ‘निवेशकों को जागरूक और शिक्षित करना इस बाजार के विस्तार की कुंजी है. इसी दिशा में काम करने के लिए InvITs और REITs के लिए अलग-अलग इंडस्ट्री बॉडी बनाई गई हैं, जो निवेशक शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने पर जोर दे रही हैं.’

इस एसेट क्लास की एक बड़ी ताकत यह है कि यह ऑपरेशनल प्रोजेक्ट्स पर आधारित होती है. विजय बताते हैं कि ‘InvITs में जो संपत्तियां शामिल होती हैं, वे पहले से चालू और आय पैदा करने वाली होती हैं. यह कैश फ्लो आधारित बिज़नेस है, जिसमें उतार-चढ़ाव कम होता है. इसी कारण इसे यील्ड प्ले कहा जाता है.’

टैक्सेशन में सुधार से बढ़ेगी रिटेल भागीदारी

रिटेल निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती कराधान (taxation) है. विजय का कहना है कि ‘अगर टैक्सेशन के नियमों को सरल बनाया जाए तो छोटे निवेशक बड़ी संख्या में इसमें हिस्सा ले सकते हैं. आज जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक शेयर बाजार से बाहर जाते हैं, तब भी बाजार पर असर कम होता है क्योंकि रिटेल निवेशक पैसा लगाए रहते हैं. यही पैसा InvITs में भी जा सकता है, जो स्थिर रिटर्न देते हैं और स्टॉक मार्केट जैसा जोखिम नहीं होता.’

संस्थागत निवेशकों से बड़ी उम्मीद

भविष्य में घरेलू संस्थागत निवेशक जैसे म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस कंपनियां और पेंशन फंड इस सेक्टर की ग्रोथ में अहम भूमिका निभा सकते हैं. विजय ने बताया कि अभी तक कनाडा, अमेरिका और मध्य-पूर्व जैसे देशों के विदेशी पेंशन फंड्स ने InvITs में निवेश कर अच्छा रिटर्न कमाया है, लेकिन भारतीय संस्थागत निवेशकों की भागीदारी सीमित रही है. उनका मानना है कि अगर म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों के निवेश की सीमा बढ़ाई जाए तो मांग और तेज़ हो सकती है.

नए क्षेत्रों से खुलेगा विस्तार का रास्ता

अब तक InvITs का फोकस टोल रोड्स, पावर ट्रांसमिशन और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर रहा है. लेकिन आने वाले समय में स्मार्ट मीटरिंग, एयरपोर्ट्स, लॉजिस्टिक्स, रेलवे और डेटा सेंटर जैसे नए क्षेत्र भी इस सूची में शामिल हो सकते हैं. विजय ने कहा, ‘डेटा सेंटर्स इसमें सबसे आगे हो सकते हैं, क्योंकि यह सेक्टर निजी निवेश से तेजी से बढ़ रहा है और लंबी अवधि के लीज़ एग्रीमेंट्स के साथ आता है.’

विनियमनों की चुनौतियां और भविष्य

फिलहाल InvITs और REITs को कर्ज़ (debt leverage) से जुड़ी पाबंदियों और कुछ कंसैशन एग्रीमेंट्स जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन नाइट फ्रैंक इंडिया का कहना है कि यह बाजार धीरे-धीरे परिपक्व हो रहा है. विजय ने कहा, ‘यह वही कहानी है जो शेयर बाजार के साथ रही. जैसे-जैसे निवेशकों की समझ बढ़ी, मार्केट तेज़ी से परिपक्व हुआ. InvITs को भी परिपक्व होने में 5-7 साल और लग सकते हैं, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि आने वाले वर्षों में यह एसेट क्लास बहुत आगे जाएगी.’

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-भारत एक्सप्रेस 



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