GST Cut: किसानों के लिए अच्छी खबर आई है. सरकार ने कई अहम कृषि उपकरणों और इनपुट्स पर जीएसटी घटाकर सिर्फ 5% कर दिया है. इसका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ेगा और किसानों का बोझ हल्का होगा.
पिछले कुछ सालों में कृषि मशीनरी महंगी होती जा रही थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मई 2023 से नवंबर 2024 के बीच जहां खेती के दूसरे इनपुट्स की कीमतें गिरीं, वहीं कृषि मशीनरी का होलसेल प्राइस इंडेक्स 2.1% बढ़ गया. इससे किसान परेशान थे.
अब जीएसटी कम होने के बाद बड़ी कंपनियों ने संकेत दिया है कि ट्रैक्टर की कीमतें 50-60 हजार रुपये तक घट सकती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बायो-पेस्टीसाइड्स और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स जैसे इनपुट्स की खुदरा कीमत भी 3-6% तक घटेगी. यानी खेती की लागत कम होगी और उत्पादन सस्ता पड़ेगा.
मछली पालन और सीफूड इंडस्ट्री को फायदा
पशुपालन और मत्स्य मंत्रालय ने बताया कि मछली के तेल, एक्सट्रैक्ट और प्रोसेस्ड फिश-श्रिम्प प्रोडक्ट्स पर टैक्स 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है. इससे सीफूड घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सस्ता होगा और भारत के सीफूड एक्सपोर्ट की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी.
पहले जहां फिशिंग नेट्स, सीफूड प्रोडक्ट्स और एक्वाकल्चर इनपुट्स पर 12 से 18% तक टैक्स लगता था, अब सब पर सिर्फ 5% लगेगा.
शुगर सेक्टर और बेकरी प्रोडक्ट्स
कन्फेक्शनरी और बेकरी प्रोडक्ट्स पर जीएसटी को 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है. इससे चीनी की खपत बढ़ने की उम्मीद है. लेकिन आटे का कारोबार करने वाले मिलर्स का कहना है कि असली राहत आम परिवारों तक नहीं पहुंची.
कारण यह है कि पैक्ड आटा, मैदा और सूजी (25 किलो तक के पैक) पर अब भी 5% जीएसटी लगेगा. यानी घरों में बनने वाली रोटियों पर कोई सीधी छूट नहीं मिलेगी. मिलर्स फेडरेशन का कहना है कि यह असमानता खत्म होनी चाहिए.
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कुछ अहम मशीनरी अब भी महंगी
हालांकि सब कुछ किसानों के पक्ष में नहीं गया. ब्रश कटर, पिट डिगर, चेनसॉ और पानी के पंप जैसे जरूरी उपकरण अब भी 18% जीएसटी के दायरे में हैं. कृषि उपकरण बनाने वाली कंपनी किसानक्राफ्ट के एमडी अंकित चितलिया ने कहा कि अगर सरकार सच में खेती का मशीनीकरण बढ़ाना चाहती है, तो इन सभी उपकरणों पर भी टैक्स 5% होना चाहिए.
खाद पर इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर खत्म
सबसे बड़ी राहत खाद बनाने वाली कंपनियों को मिली है. अब तक कच्चे माल पर 18% और तैयार फर्टिलाइज़र पर सिर्फ 5% जीएसटी लगता था. इस वजह से छोटी और मध्यम कंपनियों का काफी पैसा टैक्स में फंस जाता था.
अब कच्चे माल पर भी 5% टैक्स लगेगा. यानी कंपनियों का वर्किंग कैपिटल नहीं फंसेगा, नकदी का प्रवाह बेहतर होगा और किसानों को सस्ती खाद मिलेगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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