नई दिल्ली: जीएसटी दरों में कटौती का असर नवरात्रि के दौरान बाजार पर साफ दिखा, जब बिक्री 10 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. सरकार ने 375 वस्तुओं पर जीएसटी दरें कम कीं, जिसमें भोजन, दैनिक उपयोग की वस्तुएं, व्हाइट गुड्स, सीमेंट और ऑटोमोबाइल शामिल हैं. इससे लग्जरी और सिन उत्पादों पर सेस समाप्त हो गया, सिवाय तंबाकू के. इसका उद्देश्य अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को सरल बनाना और उपभोक्ता खर्च बढ़ाना था, भले ही कर संग्रह पर अस्थायी असर पड़े.
अधिकारियों के अनुसार, इन कटौतियों से कीमतें घटीं, जिससे परिवारों ने वाहन अपग्रेड, व्हाइट गुड्स खरीद और लाइफस्टाइल उत्पादों पर खर्च बढ़ाया. नवरात्रि के अंतिम 10 दिनों में दुकानों और कार डीलरशिप पर भीड़ उमड़ी, जो अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सहारा साबित हुई. ब्रांड्स और रिटेलर्स ने 25 से 100 प्रतिशत तक की बिक्री वृद्धि दर्ज की.
ऑटोमोबाइल सेक्टर में मारीति सुजुकी ने 3.5 लाख बुकिंग्स कीं, जिनमें 2.5 लाख लंबित हैं. नवरात्रि तक 2 लाख वाहनों की डिलीवरी की उम्मीद है, जो पिछले साल के 85,000 से 2.3 गुना अधिक है. महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) के टॉप मॉडल्स एक्सयूवी700 और स्कॉर्पियो एन में 60 प्रतिशत की बिक्री वृद्धि हुई. ह्युंडई की क्रेटा और वेन्यू मॉडल्स पर भी मजबूत मांग रही. कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में भी उल्लेखनीय उछाल आया.
एक अधिकारी ने कहा, “जीएसटी स्लैब्स को तर्कसंगत बनाकर आवश्यक और आकांक्षी वस्तुओं पर कर बोझ कम किया गया, जिससे आत्मविश्वासपूर्ण खर्च का माहौल बना. परिणामस्वरूप, ब्रांड्स ने 25-100% बिक्री वृद्धि दर्ज की, जो उपभोक्ता-चालित अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा बूस्ट है.” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद कंपनियों की चिंताओं के बावजूद डेटा सकारात्मक रहा.
सितंबर में जीएसटी संग्रह (अगस्त लेनदेन पर आधारित) 9 प्रतिशत से अधिक बढ़ा, जो चार महीनों में सबसे तेज गति है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पेंट-अप डिमांड और कर लाभों से उपभोक्ता विश्वास बढ़ाने का परिणाम है. भविष्य में यह स्थायी मांग को प्रोत्साहित करेगा, हालांकि कर संग्रह पर अस्थायी प्रभाव रहेगा. नवरात्रि की यह सफलता त्योहारों के मौसम को चमकदार बनाने का संकेत देती है.
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