फाइनेंशियल ईयर 2026 के दौरान ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटरों (GCCs) में भर्ती 27% तक बढ़ने की संभावना है, जो डोमेन विशेषज्ञों और विशेष कौशल सेट्स की बढ़ती मांग से प्रेरित है. यह बढ़ोतरी IT सेवा कंपनियों से कहीं अधिक होगी, जो वर्तमान में अनिश्चित बाजार परिस्थितियों के कारण सतर्क बनी हुई हैं.
HR विशेषज्ञों के अनुसार, GCCs भारतीय नौकरी बाजार में लगातार अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं, और आगामी वित्तीय वर्ष (FY26) में उनकी भर्ती दर IT कंपनियों से भी आगे निकल जाएगी.
कंसल्टिंग फर्म Zinnov से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में कुल भर्ती में 27% की वृद्धि होने का अनुमान है, जिसमें इंजीनियरिंग अनुसंधान और विकास (ER&D) को प्रमुख स्थान प्राप्त होगा. ER&D में 31% की वृद्धि देखी जा रही है, जो प्रमुख उद्योगों जैसे ऑटोमोटिव, एयरोस्पेस, और बैंकिंग से जुड़ा हुआ है. इसके अलावा, गैर-ER&D कार्यों में भर्ती में वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रहने का अनुमान है.
Zinnov की पार्टनर और GCC प्रैक्टिस प्रमुख, नमिता आदवी ने कहा कि खुदरा, फार्मा, स्वास्थ्य देखभाल और एयरोस्पेस क्षेत्रों में भर्ती की गति में कोई मंदी नहीं आएगी. उनका मानना है कि अमेरिकी टैरिफ और संरक्षणवादी नीतियों का इन क्षेत्रों में भर्ती योजनाओं पर कोई असर नहीं होगा.
FY25 में GCC क्षेत्र ने लगभग 1,40,000 लोगों को नियुक्त किया था, जो FY24 के मुकाबले दोगुना से भी ज्यादा था. FY26 तक, इस संख्या के बढ़कर 1,80,000 तक पहुँचने का अनुमान है. भारत में वर्तमान में 1,760 से अधिक GCCs हैं, और ये उच्च मूल्य वाली सेवाओं और ER&D पर बढ़ती फोकस के साथ आगे बढ़ रहे हैं.
वहीं, भारत की शीर्ष 5 IT सेवा कंपनियाँ FY26 में लगभग 80,000-84,000 ताजे कर्मचारियों को नियुक्त करने की योजना बना रही हैं. इन कंपनियों ने FY25 के पहले नौ महीनों में केवल 11,000 कर्मचारियों को जोड़ा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले बहुत कम था. IT सेवा क्षेत्र में भर्ती में मंदी का कारण सुस्त मांग, प्रवेश स्तर पर स्वचालन और कोडिंग के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का बढ़ता उपयोग बताया जा रहा है.
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