भारत सरकार ने शुक्रवार को इलेक्ट्रॉनिक घटक निर्माण योजना (Electronics Component Manufacturing Scheme) को मंजूरी दी. यह योजना ₹22,919 करोड़ के बजट के साथ शुरू की गई है. इसका उद्देश्य नॉन-सेमीकंडक्टर घटकों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना है. इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना रोजगार सृजन, आर्थिक विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगी.
सरकार का अनुमान है कि इस योजना से ₹59,350 करोड़ का निवेश आकर्षित होगा. इसके परिणामस्वरूप, ₹4,56,500 करोड़ का उत्पादन होगा और 91,600 प्रत्यक्ष नौकरियां मिलेंगी. इसके अलावा, अप्रत्यक्ष रूप से भी लाखों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है.
योजना की अवधि और उद्योग पर असर
इस योजना की अवधि छह वर्ष होगी, जिसमें एक साल की तैयारी अवधि शामिल है.
- इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री संघ (Elcina) के अनुसार, 2022 में भारत में USD 13 बिलियन (₹1.08 लाख करोड़) के नॉन-सेमीकंडक्टर घटकों का उत्पादन हुआ.
- 2026 तक यह बढ़कर USD 20.7 बिलियन और 2030 तक USD 37 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है.
- सरकार के सहयोग के बिना, इस क्षेत्र में USD 248 बिलियन (₹21 लाख करोड़) का घाटा हो सकता है.
- अगर सरकार समर्थन दे, तो इस घाटे को USD 146 बिलियन (₹12.36 लाख करोड़) तक कम किया जा सकता है.
इंडस्ट्री ने योजना को बताया गेम-चेंजर
Elcina के महासचिव रजु गोयल ने इसे “गेम-चेंजर” करार दिया. उन्होंने कहा कि यह योजना घटकों के निर्माण को बढ़ावा देगी और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का केंद्र बनाएगी.
Electronic Industries Association of India (Elcina) का मानना है कि सरकार की यह पहल “लंबे समय से चली आ रही सप्लाई चेन की समस्या को दूर करेगी” और भारतीय कंपनियों को ग्लोबल वैल्यू चेन (GVCs) में शामिल होने का अवसर देगी.
किन घटकों को मिलेगा लाभ?
- सब-असेंबली घटक – जैसे डिस्प्ले मॉड्यूल और कैमरा मॉड्यूल.
- बेसिक घटक – मल्टी-लेयर PCB, लिथियम-आयन सेल, और मोबाइल व आईटी हार्डवेयर उत्पादों के एनक्लोजर.
- हाई-टेक घटक – हाई-डेंसिटी इंटरकनेक्ट (HDI), फ्लेक्सिबल PCB और SMD पैसिव घटक.
- कैपेक्स प्रोत्साहन – इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए आवश्यक मशीनरी व उपकरणों को मिलेगा.
इंडस्ट्री लीडर्स का क्या कहना है?
HCL के संस्थापक और EPIC फाउंडेशन के चेयरमैन अजय चौधरी ने कहा, “यह योजना भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में अधिक मूल्यवर्धन (Value Addition) को सक्षम बनाएगी और निवेश आकर्षित करेगी. यह भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद करेगी.”
India Cellular & Electronics Association (ICEA) ने भी इस योजना को “असाधारण” बताया. ICEA अध्यक्ष पंकज मोहिंद्रू ने कहा कि यह योजना भारत को “USD 500 बिलियन की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री” बनाने में मदद करेगी.
Optiemus Electronics के प्रबंध निदेशक ए. गुरुराज ने कहा कि यह योजना “भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का पावरहाउस बनाएगी, व्यापार संतुलन सुधार करेगी और लाखों रोजगार के अवसर पैदा करेगी.”
स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 में ₹1.90 लाख करोड़ था, जो 2023-24 में ₹9.52 लाख करोड़ हो गया. इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 2014-15 में ₹0.38 लाख करोड़ था, जो 2023-24 में ₹2.41 लाख करोड़ तक पहुंच गया.
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-भारत एक्सप्रेस
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