भारत का वैश्विक व्यापार
India’s Trade Agreements: दुनियाभर में ‘अमेरिका फर्स्ट’ की पॉलिसी और डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ (आयात शुल्क) के बढ़ते दबाव के बीच भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा ‘रक्षा कवच’ तैयार कर लिया है. मोदी सरकार ने पिछले 6 वर्षों में रणनीतिक समझदारी दिखाते हुए 9 देशों और व्यापारिक समूहों के साथ महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और डील्स को अंतिम रूप दिया है.
हाल ही में न्यूजीलैंड के साथ हुई ऐतिहासिक व्यापारिक संधि इस कड़ी का ताजा उदाहरण है. 27 अप्रैल 2026 को भारत और न्यूजीलैंड ने इस करार पर हस्ताक्षर किए, जिससे भारतीय सामानों को न्यूजीलैंड के बाजार में 100% ड्यूटी-फ्री (शुल्क मुक्त) पहुंच मिल गई है.
ट्रंप के टैरिफ का मुकाबला और व्यापार की रणनीति
जब ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही दूसरे देशों से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाने का संकेत दिया, तो भारत ने अपनी निर्यात नीति में बदलाव किया. भारत ने केवल एक देश पर निर्भर रहने के बजाय यूरोप, खाड़ी देशों और ओशिनिया क्षेत्र के देशों के साथ दोस्ती बढ़ाई. हाल ही में अमेरिका के साथ भी एक ‘अंतरिम समझौता’ (Interim Agreement) किया गया है, जिसके तहत भारतीय सामानों पर लगने वाले 25% टैरिफ को घटाकर 18% करने पर सहमति बनी है. यह डील भारतीय निर्यातकों के लिए संजीवनी की तरह है.

6 साल में 9 बड़ी ट्रेड डील्स: कौन-कौन से देश शामिल?
मोदी सरकार ने 2021 से अब तक व्यापार के मोर्चे पर कई बड़े झंडे गाड़े हैं. जिनमें से मुख्य समझौते इस प्रकार हैं:
- मॉरीशस (2021): भारत का अफ्रीका क्षेत्र में पहला बड़ा व्यापारिक समझौता.
- संयुक्त अरब अमीरात – UAE (2022): खाड़ी देशों में भारत के निर्यात को बड़ी मजबूती मिली.
- ऑस्ट्रेलिया (2022): भारतीय कपड़ा और रत्न-आभूषणों के लिए नया रास्ता खुला.
- EFTA देश (2024): स्विट्जरलैंड और नॉर्वे जैसे देशों से 100 अरब डॉलर के निवेश का वादा.
- ब्रिटेन (2025): सेवा क्षेत्र और पेशेवरों के लिए ऐतिहासिक डील.
- ओमान (2025): ऊर्जा और उर्वरक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता.
- यूरोपीय संघ – EU (2026): इसे व्यापार की दुनिया में ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है.
- अमेरिका (2026): टैरिफ कम करने के लिए अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क.
- न्यूजीलैंड (अप्रैल 2026): डेयरी सेक्टर को बचाते हुए निर्यात बढ़ाने की रणनीति.

न्यूजीलैंड डील: युवाओं और व्यापारियों के लिए क्या खास?
न्यूजीलैंड के साथ हुई इस डील से भारत के कपड़ा, दवा और कृषि उत्पादों को वहां के बाजार में बिना किसी टैक्स के प्रवेश मिलेगा. अगले 5 वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार दोगुना होकर 46,220 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है. सबसे बड़ी बात यह है कि न्यूजीलैंड ने अगले 15 सालों में भारत में लगभग 18.5 लाख करोड़ रुपये (20 बिलियन डॉलर) के निवेश का भरोसा दिया है. इसके अलावा, भारतीय आईटी पेशेवरों, योग गुरुओं और छात्रों के लिए 5,000 वार्षिक वीजा का कोटा भी तय किया गया है.

इन समझौतों से आम जनता और देश को क्या फायदे होंगे?
इन डील्स का सीधा असर देश की जीडीपी और रोजगार पर पड़ेगा. भारतीय हीरा-जवाहरात, कपड़े, चमड़ा और इंजीनियरिंग सामान अब विदेशी बाजारों में सस्ते मिलेंगे, जिससे उनकी मांग बढ़ेगी. इससे भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को ग्लोबल पहचान मिलेगी. साथ ही, विदेशी कंपनियों के निवेश से भारत में नई फैक्ट्रियां लगेंगी और लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे. भारत ने इन समझौतों में अपने किसानों और डेयरी क्षेत्र के हितों का भी पूरा ख्याल रखा है, ताकि बाहरी देशों के सस्ते दूध या कृषि उत्पादों से हमारे किसानों को नुकसान न हो.
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