भारत, जो कि वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है, 2026 तक 300 बिलियन डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है. ‘मेक इन इंडिया’ और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना की मदद से यह लक्ष्य हासिल करने की उम्मीद है.
2014-15 में भारत में बिकने वाले मोबाइल फोनों में से केवल 26% ही स्थानीय स्तर पर निर्मित किए जाते थे, जो दिसंबर 2024 तक बढ़कर 99.2% हो गया. 2014 में भारत में मात्र 2 मोबाइल निर्माण इकाइयाँ थीं, जो अब बढ़कर 300 से अधिक हो गई हैं.
निर्यात में अभूतपूर्व उछाल
भारत के मोबाइल फोन निर्यात में जबरदस्त उछाल आया है. 2014-15 में यह मात्र 1,566 करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में बढ़कर 1.2 लाख करोड़ रुपये हो गया, यानी 77 गुना वृद्धि.
भारत का सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र भी तेजी से विकसित हो रहा है. पांच प्रमुख परियोजनाओं को हाल ही में मंजूरी मिली है, जिनमें कुल निवेश 1.52 लाख करोड़ रुपये के करीब है.
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के अनुसार, “भारत की मजबूत नीतियां और कुशल कार्यबल सतत विकास का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं, जिससे देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग में प्रमुख खिलाड़ी बनने में मदद मिलेगी.”
मोबाइल निर्माण का मूल्य 10 वर्षों में कई गुना बढ़ा
2014 में मोबाइल फोन निर्माण का मूल्य 18,900 करोड़ रुपये था, जो 2024 तक बढ़कर 4,22,000 करोड़ रुपये हो गया. वर्तमान में भारत में हर साल 325 से 330 मिलियन मोबाइल फोन बनाए जा रहे हैं, और देश में लगभग 1 बिलियन मोबाइल फोन उपयोग में हैं.
सरकार ने औद्योगिक वृद्धि को तेज़ करने के लिए पीएलआई योजना के तहत बजटीय आवंटन में भारी वृद्धि की है. 2024-25 के लिए 5,747 करोड़ रुपये की संशोधित अनुमानित राशि को बढ़ाकर 2025-26 में 8,885 करोड़ रुपये कर दिया गया है.
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 3 लाख करोड़ रुपये के पार
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में स्मार्टफोन प्रमुख योगदानकर्ता रहे हैं. वित्त वर्ष 2025 के पहले 11 महीनों (अप्रैल-फरवरी) में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 2.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष (2024) के 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 35% अधिक है. अकेले स्मार्टफोन निर्यात 1.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 54% अधिक है.
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग मजबूत सरकारी नीतियों, ‘मेक इन इंडिया’ पहल और पीएलआई योजना के कारण तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. 2026 तक 300 बिलियन डॉलर के उत्पादन लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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