भारत और अमेरिका के बीच होने वाली ट्रेड डील(India-US Trade Deal) पर कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने बड़ी जानकारी दी है. इस संबंध में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील इस साल अप्रैल में लागू हो सकती है. साथ ही यह भी बताया कि यूके और ओमान के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) भी इसी महीने शुरू होने की संभावना है.
इसके अलावा यूके और ओमान के साथ समझौते को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. वहीं न्यूजीलैंड के साथ होने वाला समझौता सितंबर में लागू होने की उम्मीद है.
ट्रेड डील का फ्रेमवर्क तैयार
जानकारी के मुताबिक, भारत-अमेरिका ट्रेड डील के कानूनी दस्तावेज को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों के बीच तीन दिन की बैठक 23 फरवरी से अमेरिका में शुरू होगी. इस महीने की शुरुआत में भारत और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी कर बताया था कि अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट का फ्रेमवर्क तैयार हो चुका है. अब दोनों देश इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. उम्मीद है कि इस फ्रेमवर्क पर मार्च तक साइन हो जाएंगे. इस डील के तहत दोनों देश आपस में होने वाले कई सामानों पर कस्टम ड्यूटी में छूट देंगे, ताकि व्यापार आसान और सस्ता हो सके.
क्या है ट्रेड डील पर अमेरिकी घोषणा?
अमेरिका ने घोषणा की है कि वह भारतीय उत्पादों पर लगने वाला आपसी टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा. इसके अलावा रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत का टैरिफ पहले ही हटाया जा चुका है. सरकार का कहना है कि इन फैसलों से दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और कारोबारी रिश्ते मजबूत होंगे. पीयूष गोयल ने कहा कि ये कदम भारत-अमेरिका के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देंगे.
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भारत के पैक्स सिलिका में शामिल होने के मायने?
इस बीच एक अहम कदम उठाते हुए भारत शुक्रवार को पैक्स सिलिका (PAX Silica) में शामिल हो गया. यह अमेरिका के नेतृत्व वाला रणनीतिक गठबंधन है, जिसका मकसद जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना है. साइनिंग सेरेमनी में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और भारत में अमेरिका के राजदूत सॉर्जियो गोर मौजूद रहे. सर्जियो गोर ने कहा कि पैक्स सिलिका अलग-अलग देशों की क्षमताओं को साथ लाने वाला एक गठबंधन है. यह पहल 12 दिसंबर 2025 को अमेरिका द्वारा शुरू की गई थी. इसका उद्देश्य दुनिया भर में जरूरी खनिजों की सप्लाई को सुरक्षित करना और सेमीकंडक्टर व एआई के लिए मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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