Indian Economy: वित्त मंत्रालय ने अपनी जून मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर और मजबूत स्थिति में है. घरेलू आपूर्ति और मांग मजबूत बनी हुई है, जबकि मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 4% लक्ष्य से नीचे है. मॉनसून की सामान्य प्रगति ने भी आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा दिया है. मंत्रालय ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद सतर्क आशावाद व्यक्त किया है, जिसमें विशेषज्ञों ने वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी वृद्धि 6.2 से 6.5% के बीच रहने का अनुमान लगाया है.
मुद्रास्फीति नियंत्रण में, दरों में कटौती की संभावना
जून 2025 में खुदरा मुद्रास्फीति 2.1% तक गिर गई, जो RBI के पूरे वर्ष के 3.7% अनुमान से काफी कम है. खाद्य कीमतों में कमी, स्थिर ऊर्जा लागत और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार ने इस कमी में योगदान दिया. वित्त मंत्रालय का कहना है कि कम मुद्रास्फीति के कारण RBI के लिए ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि यदि मुद्रास्फीति और विकास नरम रहता है, तो मौद्रिक नीति में और ढील दी जा सकती है.
वैश्विक चुनौतियां और अवसर
वैश्विक मंदी, विशेष रूप से अमेरिका में 2025 की पहली तिमाही में 0.5% की कमी, और टैरिफ अनिश्चितताओं के कारण निर्यात पर दबाव है. इसके बावजूद, भारत की मजबूत घरेलू मांग और स्थिर मैक्रोइकॉनमिक बुनियाद अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की संभावना निर्यात को बढ़ावा दे सकती है.
आगे की राह
मंत्रालय ने मई की समीक्षा में अर्थव्यवस्था को ‘गोल्डीलॉक्स स्थिति’ में बताया था, जहां कोई बड़ी असंतुलन नहीं है. हालांकि, निजी निवेश और ऋण वृद्धि में सुस्ती चिंता का विषय है. सरकार की पहल और मजबूत कृषि क्षेत्र विकास को समर्थन दे रहे हैं.
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