Indian Stock Market: इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार पर भारी दबाव देखने को मिला. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी चिंताओं के कारण शुरुआती तेजी टिक नहीं पाई। सप्ताह के अंत तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही 2.2% से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए.
सेक्टरवार प्रदर्शन
मेटल, आईटी, रियल्टी और ऑटो शेयरों में मुनाफावसूली साफ दिखाई दी. इन सेक्टर्स में 0.5% से 1.5% तक की गिरावट दर्ज हुई. वहीं, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया और एफएमसीजी में हल्की मजबूती रही और इन सेक्टर्स ने 0.4% से 1% तक की बढ़त हासिल की.
मिडकैप और स्मॉलकैप पर भी असर
ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.57% और स्मॉलकैप 100 में 0.39% की गिरावट दर्ज की गई.
शुरुआत में दिखी सकारात्मकता
सप्ताह की शुरुआत अच्छी रही. इसका कारण था—जीएसटी रेशनलाइजेशन की उम्मीद, अनुकूल मानसून, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमी और फेड रेट कटौती की संभावना. लेकिन अमेरिकी टैरिफ की समयसीमा नजदीक आते ही निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और बाजार लगातार तीन सत्र तक लाल निशान में रहा.
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विशेषज्ञों की राय
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि बड़े शेयरों में बिकवाली हुई, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा नुकसान इसलिए हुआ क्योंकि इनके मूल्यांकन पहले से ही ऊंचे थे. उन्होंने बताया कि भारत की मजबूत जीडीपी ग्रोथ (अप्रैल-जून तिमाही में 7.8%) बाजार को कुछ हद तक सपोर्ट दे सकती है. हालांकि, राजकोषीय दबाव और 25% रेसिप्रोकल टैरिफ का असर निकट भविष्य तक बना रह सकता है.
किन सेक्टर्स पर पड़ेगा असर?
टैरिफ का सीधा असर कपड़ा, ऑटो, धातु, उपकरण निर्माण और समुद्री खाद्य सेक्टर्स पर पड़ेगा. आईटी और फार्मा पर टैरिफ का असर तो सीमित रहेगा, लेकिन सेंटीमेंट कमजोर हो सकता है.
तकनीकी स्तर और आगे की दिशा
बजाज ब्रोकिंग रिसर्च के अनुसार निफ्टी का अहम सपोर्ट 24,400-24,350 के स्तर पर है. यदि निफ्टी इस स्तर से ऊपर बना रहता है तो 24,400 से 24,900 की रेंज में कंसोलिडेशन देखने को मिलेगा. विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार का रुझान मिला-जुला रहेगा. हालांकि एफएमसीजी, ड्यूरेबल्स, सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स को जीएसटी कटौती और सरकारी खर्च से फायदा हो सकता है.
-भारत एक्सप्रेस
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