बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि स्थिर बनी हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत उपभोक्ता मांग, सरकारी बुनियादी ढांचा खर्च और सेवाओं के क्षेत्र में मजबूती से भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिल रहा है. हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक मंदी जैसी बाहरी चुनौतियां भारत की विकास गति को प्रभावित कर सकती हैं.
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए जीडीपी अनुमान
रिपोर्ट में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर को 6 से 7 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान दिया गया है. प्रमुख वित्तीय संस्थानों के अनुमान के अनुसार:
- नोमुरा (Nomura) ने जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाकर 6.0 प्रतिशत किया.
- भारतीय वाणिज्य और उद्योग महासंघ (FICCI) ने अपने पूर्वानुमान को 6.4 प्रतिशत पर बरकरार रखा.
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी 6.5 प्रतिशत का अनुमान बनाए रखा.
- आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) ने अपना अनुमान बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत किया, जो भारत की आर्थिक संभावनाओं के प्रति आशावाद दर्शाता है.
- मूडीज़ (Moody’s) ने 7.0 प्रतिशत का अनुमान बनाए रखा, जो सभी अनुमानों में सबसे अधिक है.
रोजगार दर में मामूली बदलाव
रिपोर्ट में बताया गया कि जनवरी 2025 में शहरी रोजगार दर में गिरावट आई, जबकि ग्रामीण रोजगार दर में मामूली सुधार देखा गया. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत काम की मांग और रोजगार में भी वृद्धि हुई, जिससे यह सात महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया.
मुद्रास्फीति में गिरावट
जनवरी 2025 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) मुद्रास्फीति में गिरावट देखी गई, जो खाद्य पदार्थों की कम कीमतों और ईंधन एवं बिजली की कीमतों में लगातार गिरावट के कारण हुई. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति भी पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली.
जीएसटी संग्रह में जबरदस्त वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह में भारी वृद्धि हुई, जो मुख्य रूप से पिछले वर्ष की तुलना में आयात से होने वाले राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण था.
व्यापार संतुलन में उतार-चढ़ाव
रिपोर्ट में बताया गया कि जनवरी 2025 में व्यापार घाटा बढ़कर 23 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, क्योंकि पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में गिरावट के कारण कुल निर्यात में कमी आई. दूसरी ओर, सेवाओं के क्षेत्र में अधिशेष रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया, जिसका श्रेय सेवाओं के निर्यात में तेज वृद्धि को दिया गया.
आर्थिक संकेतकों की निगरानी महत्वपूर्ण
भविष्य की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए नीति निर्माता और उद्योग जगत के विशेषज्ञ निकट भविष्य में प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए रखेंगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि अधिकांश आर्थिक भविष्यवाणियां स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन सतर्क रहने और आवश्यक नीतिगत उपाय अपनाने की जरूरत है ताकि भारत की आर्थिक वृद्धि की गति बनी रहे.
-भारत एक्सप्रेस
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