सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा शुक्रवार (27 जून) को जारी एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का सकल मूल्य वर्धन (GVA) वित्त वर्ष 2012 और वित्त वर्ष 2024 के बीच तीन गुना से अधिक हो गया है. यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारशिला बना हुआ है, जो जीडीपी में लगभग 16 प्रतिशत का योगदान देता है और 46 प्रतिशत से अधिक आबादी का भरण-पोषण करता है.
‘कृषि और संबद्ध क्षेत्रों से उत्पादन के मूल्य पर सांख्यिकीय रिपोर्ट’ से पता चलता है कि कृषि GVA वित्त वर्ष 2012 में 1,500 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 4,800 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया. अकेले पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इस बीच, उत्पादन का सकल मूल्य (GVO) वित्त वर्ष 2012 में 1,900 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में लगभग 3,000 हजार करोड़ रुपये हो गया, जो 55 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है.
हालांकि रिपोर्ट में कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन क्षेत्र के विशेषज्ञों का सुझाव है कि अनुकूल मानसून और लक्षित सरकारी योजनाओं के संयोजन ने पिछले कुछ वर्षों में पैदावार और कृषि आय में सुधार किया है.
फसल और राज्यवार ब्योरा
फसलें सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनी हुई हैं, जो कुल जीवीओ में 54 प्रतिशत से अधिक का योगदान देती हैं. अनाज और फल और सब्जियां सामूहिक रूप से 52 प्रतिशत से अधिक योगदान देती हैं. धान और गेहूं अकेले अनाज जीवीओ का 85 प्रतिशत हिस्सा हैं.
राज्यों में उत्तर प्रदेश कृषि और संबद्ध क्षेत्रों से राष्ट्रीय जीवीओ में 17 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है. इसके बाद मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना और हरियाणा हैं, जो कुल उत्पादन का 53 प्रतिशत उत्पादन करते हैं.
फलों की श्रेणी में केले ने वित्त वर्ष 24 में 47 हजार करोड़ रुपये के जीवीओ के साथ आम को पीछे छोड़ दिया है, जबकि आम का जीवीओ 46.1 हजार करोड़ रुपये है. सब्जियों के लिए आलू शीर्ष योगदानकर्ता बना हुआ है, जिसका जीवीओ वित्त वर्ष 12 में 21.3 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 37.2 हजार करोड़ रुपये हो गया है.
पशुधन और बागवानी ने विकास को दी गति
पशुधन (Livestock) का जीवीओ वित्त वर्ष 2012 में 488 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 919 हजार करोड़ रुपये हो गया. दूध का दबदबा बना हुआ है, हालांकि इसकी हिस्सेदारी थोड़ी कम होकर 66 प्रतिशत हो गई है, जबकि मांस की हिस्सेदारी बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई है.
फूलों की खेती में तेजी से वृद्धि देखी गई है. इस अवधि में जीवीओ 17.4 हजार करोड़ रुपये से लगभग दोगुना होकर 28.1 हजार करोड़ रुपये हो गया है, जो बागवानी विविधीकरण में बढ़ती व्यावसायिक रुचि को भी दर्शाता है.
ये आंकड़े कृषि की उभरती हुई आर्थिक भूमिका को रेखांकित करते हैं, क्योंकि यह क्षेत्र न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि आर्थिक विविधीकरण और ग्रामीण रोजगार में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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