आरबीआई ने न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक पर लगाया प्रतिबंध.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने शुक्रवार को रेपो दर में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की. यह फैसला लंबे समय से ब्याज दरों में राहत की प्रतीक्षा कर रहे लोगों के लिए सुखद समाचार है. साथ ही, इससे आर्थिक विकास को भी सहारा मिलेगा.
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है. इस कटौती के बाद अब यह दर 6.25% हो गई है.
महंगाई में नरमी से हुआ फैसला
क्रिसिल लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी के अनुसार, यह कटौती अपेक्षित थी. मई 2020 के बाद यह पहली बार हुआ है जब आरबीआई ने दरें घटाई हैं.
उन्होंने बताया कि हाल ही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई में नरमी आई है. साथ ही, आर्थिक विकास को समर्थन देने की आवश्यकता भी थी. इन्हीं कारणों से आरबीआई ने यह कदम उठाया.
नीतिगत रुख अभी भी ‘न्यूट्रल’
आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ रखा है. इसका मतलब है कि आगे की दरों में बदलाव पूरी तरह महंगाई और अन्य आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा.
जोशी का कहना है कि भारत की जीडीपी वृद्धि पर ऊंची ब्याज दरों का असर पड़ा है. वहीं, आगामी बजट भी विकास को हल्का समर्थन देगा, लेकिन वित्तीय अनुशासन की राह पर बना रहेगा.
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वित्तीय वर्ष में आरबीआई रेपो दर में और 75 से 100 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती कर सकता है.
ब्याज दरों में और कटौती संभव
एक्सिस सिक्योरिटीज पीएमएस के मुख्य निवेश अधिकारी नवीन कुलकर्णी ने कहा कि आरबीआई ने ब्याज दर चक्र को उलट दिया है. यह कटौती पहले से अनुमानित थी.
उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर को 6.6% से घटाकर 6.4% कर दिया गया है.
अगले वित्त वर्ष में यह 6.7% रहने की संभावना है. कुलकर्णी का कहना है कि आगामी एमपीसी बैठकों में 25 बेसिस प्वाइंट की और कटौती देखी जा सकती है.
ये भी पढ़ें- देश भर में 14 लाख से अधिक महिलाओं की स्तन कैंसर के लिए जांच की गई: स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



