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नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नौकरियों की बढ़ती संभावनाएं, FY25 में 18.9% की वृद्धि संभावित

FY25 में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 18.9% की वृद्धि होगी. सरकारी योजनाएँ और तकनीक-आधारित नौकरियाँ इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रही हैं.

Prashant Rai Edited by Prashant Rai

टीमलीज़ सर्विसेज़ की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, FY25 में भले ही भर्ती दर में थोड़ी कमी देखी जाए, लेकिन नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र अभी भी बड़ी संख्या में नौकरियों का सृजन कर रहा है. FY25 में इस क्षेत्र में भर्ती दर 18.9% की मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकती है, जो कि FY24 के 23.7% की तुलना में थोड़ी कम है, लेकिन FY23 के 8.5% और FY22 के 10.4% से काफी अधिक है.

सरकारी योजनाएँ बढ़ा रही हैं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र का दायरा

भारत सरकार द्वारा 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य ने इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, पीएम कुसुम योजना और सोलर पीवी मॉड्यूल पीएलआई योजना जैसी सरकारी पहलें नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की वृद्धि को गति देने में महत्वपूर्ण रही हैं. इन नीतियों ने कार्यबल के विस्तार और कौशल विकास में अहम योगदान दिया है.

अध्ययन यह भी बताता है कि सौर, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा प्रणालियों में तकनीक-आधारित नौकरियों की मांग तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि कंपनियाँ दक्षता बढ़ाने के लिए डिजिटल नवाचारों को अपना रही हैं. सौर पीवी तकनीशियन, रूफर, उत्पादन ऑपरेटर, भंडारण ऑपरेटर और अपशिष्ट प्रबंधन विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है. इसके अलावा, सोलर पैनल इंस्टालर, ऊर्जा ऑडिटर और परिचालन सहायता पेशेवरों की आवश्यकता भी तेजी से बढ़ रही है.

राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु बन रहे रोजगार केंद्र

भारत में राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्य, जो देश के प्रमुख सौर ऊर्जा उत्पादक क्षेत्र हैं और अधिकांश सौर ऊर्जा संयंत्रों की मेजबानी करते हैं, इस क्षेत्र में रोजगार सृजन के केंद्र बन रहे हैं. ये राज्य प्रतिभा और निवेश को आकर्षित कर रहे हैं, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को मजबूती मिल रही है.

रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में कार्यरत 44.1% संविदा कर्मचारी आईटीआई या डिप्लोमा धारक हैं, जबकि 28.9% स्नातक, 14.6% बारहवीं पास और 4.1% परास्नातक हैं. इसके अलावा, यह उद्योग मुख्य रूप से युवा-केंद्रित है, जिसमें 54.8% कर्मचारी 26-35 वर्ष की आयु वर्ग के हैं. साथ ही, 35-40 वर्ष के आयु वर्ग के 16% और 40 वर्ष से अधिक के 18.2% अनुभवी पेशेवर इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.


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टीमलीज़ सर्विसेज़ के मुख्य परिचालन अधिकारी सुब्बुरथिनम पी. ने कहा, “भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जिसे मजबूत सरकारी पहलों और बढ़ते कॉर्पोरेट निवेश का समर्थन प्राप्त है. इस क्षेत्र में विशिष्ट और तकनीक-आधारित नौकरियों की मांग लगातार बढ़ रही है. हालांकि, उच्च कर्मचारी छोड़ने की दर और कौशल अंतराल को दूर करने के लिए संगठित कार्यबल योजना की आवश्यकता है. व्यावसायिक प्रशिक्षण, डिजिटल कौशल विकास और कर्मचारी प्रतिधारण रणनीतियों को अपनाकर कंपनियाँ एक स्थायी प्रतिभा पाइपलाइन बना सकती हैं.”

-भारत एक्सप्रेस



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