India-Russia Collaboration: रूस भारत में जहाज निर्माण के क्षेत्र में कदम रखने की योजना बना रहा है. रूस के फर्स्ट डिप्टी पीएम डेनिस मंटुरोव ने कहा कि दोनों देश आर्कटिक क्लास जहाजों का जॉइंट प्रोडक्शन कर सकते हैं. यह कदम भारत के शिपबिल्डिंग सेक्टर को बूस्ट देगा. रूस आर्कटिक कंडीशंस के लिए बर्फ तोड़ने की टेक्नोलॉजी वाले पोलर कार्गो जहाजों बनाने में लीडर है. घरेलू स्तर पर भारत भी अपना पहला पोलर रिसर्च vessel (PRV) बनाने की तैयारी में है. जून में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) और नॉर्वे की Kongsberg Oslo के बीच MoU साइन हुआ था.

इंडिया-रशिया जॉइंट वर्किंग ग्रुप
भारत के मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज के साथ रूस की बातचीत चल रही है. इंडिया-रूस जॉइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) इस पर डिस्कशन कर रहा है, जो अभी नया है. रूसी कंपनी Delo Group भारत में जॉइंट वेंचर के जरिए प्रेजेंस बनाने में दिलचस्पी ले रही है. अभी स्टेट-ओन्ड शिपयार्ड्स के लिए कोई फर्म प्रपोजल नहीं है, लेकिन प्राइवेट अप्रोच पॉसिबल हैं. चेन्नई और व्लादिवोस्तोक के बीच ईस्टर्न कॉरिडोर ऑपरेशनल है. यहां क्रूड ऑयल और कोकिंग कोल के अलावा अन्य कार्गो को बढ़ाने की बातचीत है.
आर्थिक संदर्भ और अवसर
ट्रेड बढ़ने से चेन्नई-व्लादिवोस्तोक और नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर महत्वपूर्ण हो गए हैं. आर्कटिक आइस मेल्टिंग की वजह से नॉर्दर्न रूस में इंडियन कार्गो हैंडलिंग बढ़ रही है. नॉर्दर्न सी रूट (NSR) नए शिपिंग ऑप्शन दे रहा है. कोचिन शिपयार्ड को इस साल CMA CGM से six dual-fuel container vessels के लिए letter of intent मिला. भारत NSR डिस्कशन में शामिल है. मंटुरोव ने कहा कि मैरिटाइम रूट्स से ट्रेड बढ़ रहा है, इसलिए stable Eurasian Transport Framework जरूरी है.
भविष्य की संभावनाएं
यह सहयोग दोनों देशों के इकोनॉमिक संबंधों को मजबूत करेगा. रूस के एक्सपीरियंस से भारत पोलर विजल्स बना सकेगा, जो क्लाइमेट चेंज और रिसर्च के लिए उपयोगी होंगे. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे जॉब्स क्रिएट होंगी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा. अभी डिटेल्स फाइनल नहीं हैं, लेकिन यह एक प्रॉमिसिंग स्टेप है.
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