ये इमेज एआई द्वारा बनाई गई है.
आज हफ्ते का पहला दिन भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के लिए किसी ‘ब्लैक मंडे’ से कम साबित नहीं हुआ. सोमवार की सुबह जैसे ही बाजार खुला, दलाल स्ट्रीट पर कोहराम मच गया. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग ने भारतीय निवेशकों की नींद उड़ा दी है. सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए और देखते ही देखते बाजार 3 प्रतिशत तक नीचे फिसल गया.
बाजार खुलते ही मचा हड़कंप
सोमवार की सुबह निवेशकों के लिए बुरी खबर लेकर आई. सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से करीब 1,862 अंक नीचे खुला, लेकिन गिरावट यहीं नहीं रुकी. सुबह 9:30 बजे तक सेंसेक्स 2,404 अंक (3.05%) टूटकर 76,514 के स्तर पर आ गया. वहीं, निफ्टी भी 727 अंक लुढ़ककर 23,723 पर कारोबार करता दिखा. बाजार में मची इस भगदड़ से छोटे और मझोले शेयरों (Midcap & Smallcap) का भी बुरा हाल रहा, जो 3 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए.
कच्चे तेल ने बिगाड़ा खेल
इस महा-गिरावट की सबसे बड़ी वजह सात समंदर पार छिड़ा तनाव है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार में भूचाल ला दिया है. खबर है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है, जिससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई रुकने का डर पैदा हो गया है. इसी का नतीजा है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें देखते ही देखते 21 प्रतिशत उछलकर 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं.
ईरान, कुवैत और यूएई जैसे देशों द्वारा तेल उत्पादन में कटौती के ऐलान ने आग में घी का काम किया. इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने अनिश्चितता और बढ़ा दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि तेल की बढ़ती कीमतें शांति के लिए चुकाई जाने वाली ‘छोटी कीमत’ है.
बैंकिंग और ऑटो सेक्टर को झटका
बाजार में हर तरफ लाल निशान का बोलबाला रहा. सबसे ज्यादा मार सरकारी बैंकों (PSU Banks) पर पड़ी, जिनका इंडेक्स 4 प्रतिशत तक टूट गया. इसके अलावा मारुति, महिंद्रा, टाटा स्टील और एसबीआई जैसे दिग्गजों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई. केवल आईटी सेक्टर ने थोड़ी बहुत हिम्मत दिखाई, लेकिन वह भी गिरावट से बच नहीं सका.
एक्सपर्ट्स का क्या कहना?
चॉइस ब्रोकिंग के रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर के मुताबिक, तकनीकी चार्ट पर बाजार काफी कमजोर नजर आ रहा है. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बीते शुक्रवार को ही करीब 6,030 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर अपने हाथ खींच लिए थे. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निफ्टी 25,000 के स्तर के ऊपर मजबूती से नहीं टिकता, तब तक नई खरीदारी से बचना चाहिए. फिलहाल बाजार के लिए 23,500 का स्तर एक लक्ष्मण रेखा की तरह है; अगर निफ्टी इसके नीचे गया, तो गिरावट और गहरी हो सकती है.
निवेशकों के लिए सलाह
बाजार की इस उठापटक को देखते हुए जानकारों का कहना है कि अभी ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाना ही समझदारी है. युद्ध और तेल की कीमतों की अनिश्चितता के बीच जल्दबाजी में पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है. केवल उन्हीं शेयरों पर ध्यान दें जिनके फंडामेंटल बहुत मजबूत हैं.
ये भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट में तनाव… जंग के बीच सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

