केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के 121वें वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए देश के आर्थिक रूपांतरण और वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका का विस्तृत खाका पेश किया. उन्होंने ऐतिहासिक 121 वर्ष पूरे करने पर पीएचडीसीसीआई को बधाई दी और उद्योग जगत में नया जोश भरते हुए नारा दिया— “हम करेंगे, हम कर सकते हैं और हमें यह करना ही होगा” (We shall do, we can do it, and we must do it).
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि सतत विकास को बनाए रखने, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने और भारतीय व्यवसायों के लिए नए रास्ते खोलने के लिए त्वरित फैसले, चुस्त सोच और समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता है. उन्होंने विपरीत परिस्थितियों और आपदाओं को अवसरों में बदलने की भारतीय क्षमता को रेखांकित किया.
डेमोग्राफिक डिविडेंड और आधुनिक तकनीक विकास के इंजन
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की युवा आबादी (डेमोग्राफिक स्ट्रेंथ), बढ़ता घरेलू उपभोग, कुशल कार्यबल और आधुनिक तकनीकों का तेजी से अपनाया जाना देश की विकास गाथा के सबसे बड़े चालक हैं. दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत अब वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) में अपनी भागीदारी बढ़ाने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और अत्याधुनिक आर्थिक क्षेत्रों के विकास के लिए पूरी तरह तैयार है.
मुक्त व्यापार समझौते और वैश्विक पहुंच
अंतरराष्ट्रीय आर्थिक साझेदारी के महत्व पर चर्चा करते हुए वाणिज्य मंत्री ने कहा:
भारत-यूके व्यापार समझौता: भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) पर हस्ताक्षर होना अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में एक बड़ा मील का पत्थर है.
कनाडा सहित अन्य देशों से वार्ता: कनाडा सहित विभिन्न देशों के साथ चल रही और प्रस्तावित व्यापार वार्ताएं भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार खोलने का माध्यम बन रही हैं.
हितधारकों के हितों की रक्षा: ऐसे सभी समझौतों में देश के एमएसएमई (MSMEs), किसानों और निर्यातकों के हितों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार का लाभ हर स्तर के कारोबारी तक पहुंचे.
10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और 1 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का संकल्प तभी पूरा होगा जब बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार हो और विनिर्माण व सेवा क्षेत्र में उत्पादकता बढ़े.
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए 15 प्रतिशत की लक्षित विकास दर की आवश्यकता होगी. इसके लिए निर्यात टोकरी का विविधीकरण, उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करनी होगी.
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और एफडीआई
उन्होंने कहा कि भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का तेजी से विस्तार देश की शोध, एनालिटिक्स और प्रौद्योगिकी क्षमता को दर्शाता है. विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को आकर्षित करने के लिए सरकार एक पारदर्शी और सुगम नियामक वातावरण उपलब्ध करा रही है. उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय वैक्सीन निर्माण और आत्मनिर्भर आपूर्ति श्रृंखला के अनुभव को याद करते हुए कहा कि भारत आज पूरी दुनिया के लिए सबसे भरोसेमंद और पारदर्शी व्यापारिक साझेदार बन चुका है. समारोह के दौरान पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने केंद्रीय मंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि पीएचडीसीसीआई देश के सबसे पुराने उद्योग मंडलों में से एक है जो एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार को लगातार बढ़ावा दे रहा है. कार्यक्रम में उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता, संजय सिंघानिया, सीईओ एवं सेक्रेटरी जनरल डॉ. रणजीत मेहता सहित कई उद्योगपति और राजनयिक मौजूद रहे.
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