अब क्यों वसूला जाएगा पैसा?
UPI MDR Charges: जनवरी 2020 में सरकार ने डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए ज़ीरो एमडीआर नीति लागू की थी. उस समय यूपीआई तेजी से फैल रहा था और बैंकों व पेमेंट ऐप्स को सरकारी बजट से प्रोत्साहन राशि दी जाती थी ताकि नेटवर्क मुफ्त में चल सके. अगस्त 2026 तक यूपीआई के जरिए 2,451 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 29.9 लाख करोड़ रुपये रही.
खर्च बढ़ा, सब्सिडी कम
वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने यूपीआई प्रोत्साहन के लिए 2,000 करोड़ रुपये का बजट रखा. लेकिन एनपीसीआई और उद्योग जगत के मुताबिक, इस नेटवर्क की साइबर सुरक्षा, सर्वर क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर का सालाना खर्च करीब 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. ऐसे में सिर्फ सरकारी सब्सिडी से इतने बड़े नेटवर्क को लंबे समय तक चलाना मुश्किल हो गया.
2,000 रुपये तक का भुगतान पूरी तरह मुफ्त
अब 2,000 रुपये तक का भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा. व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. लेकिन 2,000 रुपये से ज्यादा के व्यापारी भुगतान (P2M) पर 0.4% एमडीआर लगेगा. उदाहरण के लिए, 5,000 रुपये के भुगतान पर 20 रुपये और 50,000 रुपये के भुगतान पर 200 रुपये शुल्क लगेगा. अधिकतम कैप 300 रुपये रखा गया है, यानी 75,000 रुपये से ऊपर के भुगतान पर भी शुल्क 300 रुपये से ज्यादा नहीं होगा.
जरूरी सेवाओं पर राहत
रेलवे, ईंधन, दूरसंचार और बीमा जैसी सार्वजनिक सेवाओं पर 2,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट शुल्क लगेगा. वहीं शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड जैसे कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन पर केवल 0.02% का सांकेतिक शुल्क तय किया गया है.
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क्यों किया बदलाव?
सरकार का कहना है कि यह नीतिगत बदलाव यूपीआई नेटवर्क को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए जरूरी है. छोटे और रोज़मर्रा के भुगतान आम नागरिकों के लिए पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, जबकि बड़े लेनदेन से मिलने वाला शुल्क नेटवर्क की लागत को पूरा करने में मदद करेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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