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बुल रन: अमेरिका-ईरान शांति की उम्मीद से झूमा बाजार, डिफेंस और रियल्टी सेक्टर चमके

Indian Stock Market: अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय शेयर बाजार में मजबूती देखने को मिली. निफ्टी 24,000 के पार पहुंचा जबकि सेंसेक्स ने भी साप्ताहिक बढ़त दर्ज की.

Indian Stock Market

Indian Stock Market: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा शांति समझौते की खबरों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा. साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी बाजार को सहारा दिया. इसी वजह से भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त के साथ बंद हुआ.

सप्ताहभर में निफ्टी 1.65 प्रतिशत मजबूत होकर 24,013.10 के स्तर पर पहुंचा, जबकि सेंसेक्स ने 1.69 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की. हालांकि शुक्रवार को मुनाफावसूली और कुछ क्षेत्रों में बिकवाली के कारण दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट देखी गई.

आईटी शेयरों में दबाव, अन्य सेक्टर चमके

सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली. इसका मुख्य कारण वैश्विक आईटी कंपनी एक्सेंचर द्वारा अपने राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती करना रहा. इसके चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स पूरे सप्ताह में 6.5 प्रतिशत टूट गया.

दूसरी ओर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल एस्टेट, फार्मा और डिफेंस सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी हुई. डिफेंस सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 6.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की.

कच्चे तेल और रुपये ने दिया सहारा

अमेरिका-ईरान वार्ता की उम्मीदों के बीच ब्रेंट क्रूड का भाव 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया था, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों को राहत मिली. हालांकि सप्ताह के अंत में वार्ता रद्द होने की खबर के बाद तेल की कीमतों में गिरावट थम गई. इस दौरान भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले करीब 79 पैसे चढ़कर 94.35 के आसपास पहुंच गया.


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मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा तेजी

बड़े शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 2.62 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 3.23 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई.

विशेषज्ञों के अनुसार भू-राजनीतिक हालात में सुधार बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं. हालांकि निवेशकों की नजर मानसून की प्रगति, भारत के पीएमआई और बैंकिंग क्रेडिट ग्रोथ के आंकड़ों पर रहेगी. वहीं अमेरिका के पीसीई मुद्रास्फीति और जीडीपी से जुड़े आंकड़े भी वैश्विक बाजार की दिशा तय कर सकते हैं. यदि मानसून कमजोर रहता है तो कृषि उत्पादन, ग्रामीण मांग और खाद्य महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है.

-भारत एक्सप्रेस



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