Bharat Express DD Free Dish

महिलाओं द्वारा कर्ज लेने की प्रवृत्ति तीन गुना बढ़ी, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अधिक मांग

2019 से 2024 के बीच महिलाओं द्वारा कर्ज लेने की प्रवृत्ति तीन गुना बढ़ी. 60% महिला उधारकर्ता अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से हैं. बिजनेस और गोल्ड लोन में महिलाओं की हिस्सेदारी भी बढ़ी.

Prashant Rai Edited by Prashant Rai

महिलाओं द्वारा कर्ज लेने की मांग 2019 से 2024 के बीच तीन गुना बढ़ी है. खासतौर पर अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में इसका असर ज्यादा देखा गया है. सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 60% महिला उधारकर्ता इन क्षेत्रों से हैं.

सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग, ट्रांसयूनियन सिबिल और माइक्रोसेव कंसल्टिंग द्वारा तैयार रिपोर्ट में बताया गया कि 2019 से महिलाओं की बिजनेस लोन में हिस्सेदारी 14% बढ़ी है. वहीं, गोल्ड लोन में उनकी भागीदारी 6% बढ़ी है. दिसंबर 2024 तक, कुल बिजनेस लोन लेने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी 35% हो गई थी.

रिपोर्ट में बताया गया कि देश की आधी आबादी महिलाएं हैं, लेकिन उनका जीडीपी में योगदान सिर्फ 18% है. यह रिपोर्ट आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर केंद्रित है.

महिलाओं की क्रेडिट हिस्सेदारी में भी असमानता देखी गई. 30 साल से कम उम्र की महिलाओं का रिटेल क्रेडिट में केवल 27% हिस्सा था, जबकि पुरुषों का यह आंकड़ा 40% था.


ये भी पढ़ें- फरवरी में भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए 1.65 अरब डॉलर, औसत वैल्यूएशन 83.2 मिलियन डॉलर


2024 तक महिलाओं द्वारा लिए गए 42% लोन पर्सनल फाइनेंस के लिए थे, जो 2019 में 39% था. हालांकि, बिजनेस सेक्टर में महिलाओं को मिलने वाले कर्ज में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी ज्यादातर महिलाएं गोल्ड लोन पर निर्भर हैं. 2024 में महिलाओं द्वारा लिए गए कुल लोन में से 36% गोल्ड लोन थे, जबकि 2019 में यह आंकड़ा सिर्फ 19% था.

नीति आयोग के सीईओ बी. वी. आर. सुब्रमण्यम ने कहा, “निष्कर्ष उत्साहजनक हैं. महिलाओं में अपने क्रेडिट स्वास्थ्य की निगरानी करने की प्रवृत्ति में 42% सालाना वृद्धि दर्ज की गई है. यह वित्तीय जागरूकता और जिम्मेदार क्रेडिट प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.”

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read