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बड़े भाई को ट्रैक्टर से कुचलकर मार डालने वाले शख्‍स को उम्रकैद, जज ने फैसले में दिया श्रीराम-भरत का उदाहरण

MUZAFFARNAGAR BROTHER MURDER CASE: मुजफ्फरनगर में अदालत ने खेत के विवाद में बड़े भाई पर ट्रैक्टर चढ़ाकर हत्या करने वाले आरोपी सुखपाल को उम्रकैद की सजा और 1 लाख रुपये का जुर्माना सुनाया है. जानिए शर्मनाक घटना के बारे में

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

नीरज त्यागी


उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 ने एक शख्‍स को अपने बड़े भाई की निर्मम हत्या करने के मामले में सजा सुनाई. घटना के लगभग तीन साल बाद अदालत ने हत्यारे को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाते हुए ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया.

हत्यारे का नाम सुखपाल है, जिसने अपने बड़े भाई को ट्रैक्टर चढ़ाकर मार डाला था. आज अदालत का फैसला आने के बाद जब पुलिस अभिरक्षा में दोषी सुखपाल को जेल ले जाया जा रहा था, तब उसके चेहरे पर पछतावे के बजाय एक शर्मनाक और बेशर्म मुस्कराहट नजर आई.

खेत पर काम करते समय की थी बड़े भाई की हत्‍या

शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह दिल दहला देने वाला मामला 22 अप्रैल 2023 का है. शाहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत खेत पर काम करते समय ट्रैक्टर-ट्रॉली निकालने को लेकर दो सगे भाइयों में विवाद हो गया था.

बहस बढ़ने पर छोटे भाई सुखपाल ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर बड़े भाई तेजवीर की बुरी तरह पिटाई की. इतने से भी मन नहीं भरा तो सुखपाल ने तेजवीर पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया. इलाज के दौरान अस्पताल में तेजवीर की मौत हो गई थी. मृतक के पुत्र सोनू सैनी की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को जेल भेजा था.

कोर्ट ने राम-भरत का जिक्र कर की तल्ख टिप्पणी

अदालत में अभियोजन पक्ष ने 7 गवाह मजबूती से पेश किए. वादी सोनू सैनी और मृतक की पत्नी शिमला देवी की गवाही और पुख्ता सबूतों के आधार पर धारा 302 के तहत जुर्म साबित हुआ. फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने मामले की संगीनता पर बेहद तल्ख टिप्पणी की.

कोर्ट ने कहा:

“सनातन संस्कृति में भगवान श्री राम ने अपने भाई के लिए राजपाठ छोड़ दिया था, लेकिन यहां एक भाई ने मामूली विवाद में अपने राम समान बड़े भाई पर ट्रैक्टर चढ़ाकर उसकी निर्मम हत्या कर दी.”

न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर के फैसले की मिसाल

आपको बता दें कि फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर कड़े और समयबद्ध फैसलों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने बीते कुछ महीनों के भीतर 10 संगीन मामलों में फैसला सुनाते हुए अब तक 22 अभियुक्तों को फांसी की सजा और अब इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाकर न्याय व्यवस्था में एक मिसाल कायम की है.

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