AI Revolution: भारत एक्सप्रेस के खास टीवी कार्यक्रम ‘ज्ञान विज्ञान की बात’ में प्रोफेसर डॉ. रचना (Dr. Rachna) ने श्रुति खरबंदा से एआई, रोबोटिक्स और स्टेम शिक्षा पर विशेष चर्चा की. श्रुति खरबंदा एक्स थ्राई रोबोटिक्स (X-Thrive Robotics) की फाउंडर हैं और महिलाओं को तकनीक में आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं.
प्रो. डॉ. रचना और श्रुति खरबंदा की पूरी बातचीत आप यहां यूट्यूब पर देख सकते हैं, जहां एआई के फायदे और चुनौतियों पर रोशनी डाली गई. श्रुति ने बताया कि एआई घंटों का काम मिनटों में कर देता है, लेकिन यह इंसानों की जगह नहीं लेगा.
स्टेम शिक्षा का महत्व
श्रुति खरबंदा ने स्टेम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स) पर बात की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सरकार स्टेम को बढ़ावा दे रही है. 2025-26 के बजट में 8.8% हिस्सा स्टेम शिक्षा के लिए रखा गया है. योजनाएं जैसे विज्ञान ज्योति, जहां स्कूल के बच्चों को वर्कशॉप और बूट कैंप के जरिए साइंस से जोड़ा जाता है. श्रुति ने कहा कि बचपन से ही बच्चों को स्टेम सिखाना जरूरी है, क्योंकि तकनीक हर जगह है – फोन से लेकर स्मार्ट फ्रिज तक. अगर हम स्टेम नहीं सीखेंगे, तो सिर्फ यूजर बनकर रह जाएंगे. भारत को प्रोडक्ट बनाने वाला देश बनाना है.
महिलाओं की भूमिका और चुनौतियां
चर्चा में महिलाओं पर फोकस रहा. श्रुति ने कहा कि साइंस को पुरुषों का क्षेत्र माना जाता है, लेकिन अब बदलाव आ रहा है. भारत में रॉकेट वुमन ऋतु करिधाल जैसी महिलाएं हैं, जिन्होंने चंद्रयान मिशन में योगदान दिया. नोबेल पुरस्कार विजेता मैरी क्यूरी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं हमेशा आगे रही हैं. लेकिन लीडरशिप में कम दिखती हैं क्योंकि समाज की सोच पुरानी है. बचपन से लड़कियों को गुड़िया और लड़कों को ट्रक जैसे खिलौने दिए जाते हैं, जो सोच को प्रभावित करते हैं. श्रुति ने ‘बॉयज क्लब कल्चर’ का जिक्र किया और कहा कि मीडिया में महिलाओं को कम हाइलाइट किया जाता है. कोविड के बाद वर्क फ्रॉम होम से महिलाओं को फायदा हुआ है.
महिलाओं के लिए सरकार की योजनाएं
श्रुति ने महिलाओं के लिए सरकारी योजनाओं पर रोशनी डाली. वेस्ट (वुमेन इन स्टेम) प्रोग्राम के तहत विज्ञान ज्योति, प्रगति स्कॉलरशिप और गति जैसे कार्यक्रम हैं. अटल टिंकरिंग लैब में 25,000 से ज्यादा रोबोटिक्स लैब बनाए गए हैं. ड्रोन दीदी योजना में गांव की महिलाओं को ड्रोन ट्रेनिंग और फाइनेंशियल मदद दी जाती है, ताकि वे कृषि में काम कर सकें. 1 लाख करोड़ रुपये रिसर्च के लिए दिए गए हैं. श्रुति ने कहा कि नई शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषाओं में स्टेम पढ़ाई हो रही है, ताकि सबको मौका मिले.
एआई और रोबोटिक्स की दुनिया
श्रुति ने एआई को सरल तरीके से समझाया. एआई कंप्यूटर प्रोग्राम से अलग है, क्योंकि यह सीख सकता है और पैटर्न पहचानता है. लेकिन यह इंटेलिजेंट नहीं है, सिर्फ डेटा पर आधारित काम करता है. अगर डेटा गलत हो, तो आउटपुट भी गलत. रोजमर्रा के उदाहरण दिए जैसे फोन में फेस रिकग्निशन, ऑटो-करेक्ट, सीरी, एलेक्सा. सोशल मीडिया में कंटेंट सजेशन, ऑनलाइन शॉपिंग में रेकमेंडेशन, यूपीआई में फ्रॉड डिटेक्शन और गूगल मैप्स में ट्रैफिक जानकारी – सब एआई से. लेकिन गूगल मैप्स के एक्सीडेंट के केस बताते हैं कि यह परफेक्ट नहीं.

चैटजीपीटी – चैटबॉट्स और जोखिम
श्रुति ने चैटबॉट्स पर बात की, जैसे चैटजीपीटी. ये इंटरनेट का डेटा इस्तेमाल कर सवालों के जवाब देते हैं. लेकिन खतरा है कन्फर्मेशन बायस का – ये कभी ‘नहीं’ नहीं कहते, जो गलत सलाह दे सकता है. उदाहरण दिया कि अगर कोई सुसाइड की बात करे, तो चैटबॉट डॉक्टर की सलाह नहीं देगा. श्रुति ने कहा कि एआई का असली काम जीवन आसान बनाना है – काम जल्दी, सही और कम मेहनत में.
प्रो. डॉ. रचना और श्रुति खरबंदा के कुछ मुख्य सवाल-जवाब:
डॉ. रचना: स्टेम प्रोग्राम क्या है और इसका महत्व क्या है?
श्रुति: स्टेम का मतलब साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स है. सरकार बजट का 8.8% हिस्सा इसमें लगा रही है. योजनाएं जैसे विज्ञान ज्योति बच्चों को बचपन से साइंस सिखाती हैं. तकनीक हर जगह है, इसलिए स्टेम सीखना जरूरी है ताकि भारत प्रोडक्ट बनाने वाला देश बने.
डॉ. रचना: महिलाओं को स्टेम में कैसे बढ़ावा दिया जा रहा है?
श्रुति: वेस्ट प्रोग्राम के तहत स्कॉलरशिप, ग्रांट्स और ट्रेनिंग दी जा रही है. ड्रोन दीदी योजना में गांव की महिलाओं को ड्रोन से कृषि बिजनेस सिखाया जाता है. 1 लाख करोड़ रिसर्च के लिए दिए गए हैं.
डॉ. रचना: साइंस को पुरुषों का क्षेत्र क्यों माना जाता है और महिलाएं लीडरशिप में क्यों कम?
श्रुति: पुरानी सोच और बॉयज क्लब कल्चर की वजह से. बचपन से खिलौनों में फर्क है. मीडिया में महिलाओं को कम दिखाया जाता है. लेकिन अब वर्क फ्रॉम होम से बदलाव आ रहा है. घर और करियर का बैलेंस जरूरी है.
डॉ. रचना: एआई और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में क्या फर्क है?
श्रुति: प्रोग्रामिंग फिक्स्ड इंस्ट्रक्शन पर काम करती है. एआई सीखता है, पैटर्न पहचानता है और बदलता है. लेकिन यह इंटेलिजेंट नहीं, सिर्फ डेटा पर निर्भर.
डॉ. रचना: रोजमर्रा में एआई के उदाहरण क्या हैं?
श्रुति: फोन में फेस रिकग्निशन, सोशल मीडिया सजेशन, गूगल मैप्स, चैटबॉट्स जैसे चैटजीपीटी. लेकिन जोखिम हैं, जैसे गलत सलाह.
श्रुति ने कहा कि एआई इंसानों को बेहतर बनाएगा, कमतर नहीं. भारत को सर्विस से प्रोडक्शन नेशन बनाना है. इनविंसिबल रोबोट लीग जैसे उनके प्रोजेक्ट रोबोटिक्स को आईपीएल जैसा बनाएंगे. यह बातचीत बताती है कि स्टेम और एआई से भारत आगे बढ़ेगा, खासकर महिलाओं की भागीदारी से.
-भारत एक्सप्रेस
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