भारत में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के तरीके में आज एक बड़ी डिजिटल क्रांति होने जा रही है. आज 2 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक नई ‘मोबाइल आधारित आपदा संचार प्रणाली’ (Mobile-based Disaster Communication System) का शुभारंभ करेंगे. यह प्रणाली बाढ़, तूफान और भारी बारिश जैसी गंभीर आपदाओं के दौरान हर नागरिक के मोबाइल पर समय रहते अलर्ट पहुंचाएगी, जिससे लाखों जानें बचाई जा सकेंगी और नुकसान को कम किया जा सकेगा.
NDMA और DoT का ‘डिजिटल सुरक्षा कवच’
इस खास कार्यक्रम में संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी विशेष रूप से मौजूद रहेंगे. इस जीवन रक्षक प्रणाली को दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के मजबूत सहयोग से विकसित किया गया है. टेलीमैटिक्स विकास केंद्र (C-DOT) द्वारा तैयार किया गया यह ‘एकीकृत अलर्ट सिस्टम’ पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरता है. यह सिस्टम ‘अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ’ (ITU) द्वारा अनुशंसित ‘कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल’ (CAP) पर आधारित है, जो इसे दुनिया के सबसे बेहतरीन अलर्ट सिस्टम्स में से एक बनाता है.
19 भाषाओं में अब तक 134 अरब SMS अलर्ट
यह प्रणाली कितनी विशाल और प्रभावी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आपदा प्रबंधन अधिकारियों द्वारा टेस्टिंग और शुरुआती चरणों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है. प्राकृतिक आपदाओं, मौसम संबंधी चेतावनियों और चक्रवाती घटनाओं के दौरान अब तक 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में 134 बिलियन (134 अरब) से अधिक SMS अलर्ट प्रसारित किए जा चुके हैं. इससे भाषा की कोई बाधा नहीं रहती और हर व्यक्ति को उसकी अपनी भाषा में खतरे की सटीक जानकारी मिल जाती है.
भारत की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़, भूस्खलन और चक्रवात का खतरा बना रहता है. ऐसे में आज लॉन्च हो रही यह ‘मोबाइल आपदा संचार प्रणाली’ हर भारतीय के लिए एक डिजिटल ‘सुरक्षा कवच’ का काम करेगी. पलक झपकते ही सही समय पर मिली सटीक जानकारी से न केवल आम नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का मौका मिलेगा, बल्कि एनडीएमए और स्थानीय प्रशासन के बचाव कार्यों में भी अभूतपूर्व तेजी आएगी.
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