CBSE New Rule: सीबीएसई (CBSE) ने 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर एक ऐसा फैसला किया है, जो आने वाले समय में पूरी परीक्षा प्रणाली का चेहरा बदल देगा. बोर्ड ने अब कॉपियां जांचने के पारंपरिक तरीके को अलविदा कह दिया है. अब 12वीं के छात्रों की आंसरशीट्स लाल पेन से नहीं, बल्कि कंप्यूटर की स्क्रीन पर माउस के जरिए जांची जाएंगी. इस नई तकनीक को ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) का नाम दिया गया है, और इसका असर सीधे तौर पर देश भर के 16 लाख से ज्यादा छात्रों पर पड़ने वाला है.
क्या है ये डिजिटल चेकिंग का नया फंडा?
आसान शब्दों में कहें तो, अब शिक्षकों के पास कागज की कॉपियों का बंडल नहीं पहुंचेगा. परीक्षा खत्म होने के बाद स्टूडेंट्स की आंसरशीट्स को स्कैन किया जाएगा और उन्हें डिजिटल फाइलों में बदल दिया जाएगा. इसके बाद एग्जामिनर अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर ही इन कॉपियों को चेक करेंगे. यहां सबसे अच्छी बात यह है कि मार्क्स जोड़ने या टोटलिंग की गलती की गुंजाइश खत्म हो जाएगी, क्योंकि सॉफ्टवेयर नंबरों को खुद-ब-खुद कैलकुलेट कर लेगा.
छात्रों और बोर्ड को क्या होगा फायदा?
रिजल्ट में गड़बड़ी कम: अक्सर सुनने को मिलता था कि टोटलिंग में गलती की वजह से किसी छात्र के नंबर कम रह गए. डिजिटल मार्किंग से यह टेंशन खत्म हो जाएगी.
तेजी से आएगा रिजल्ट: कॉपियों को एक शहर से दूसरे शहर ले जाने और बांटने में जो समय बर्बाद होता था, उसकी बचत होगी. इसका मतलब है कि बोर्ड रिजल्ट पहले के मुकाबले जल्दी घोषित कर पाएगा.
मार्क्स वेरिफिकेशन का झंझट खत्म: जब चेकिंग इतनी सटीक होगी, तो दोबारा कॉपी चेक कराने या वेरिफिकेशन की जरूरत बहुत कम रह जाएगी.
पेपरलेस काम: यह पूरा सिस्टम पर्यावरण के अनुकूल है क्योंकि इसमें कागज का इस्तेमाल और कॉपियों के ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बच जाएगा.
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10वीं के छात्रों का क्या?
दिलचस्प बात यह है कि सीबीएसई ने फिलहाल यह बदलाव सिर्फ 12वीं क्लास के लिए ही लागू किया है. 10वीं बोर्ड की परीक्षाओं का मूल्यांकन अभी भी पुराने ‘फिजिकल मोड’ यानी पेन और पेपर के जरिए ही जारी रहेगा. ऐसा लगता है कि बोर्ड पहले बड़े स्तर पर 12वीं के साथ इस सिस्टम को परखना चाहता है.
स्कूलों के लिए जारी हुआ ‘सख्त’ फरमान
बोर्ड ने स्कूलों को साफ कर दिया है कि उन्हें अब अपनी कंप्यूटर लैब्स को अपग्रेड करना होगा. कम से कम 2 Mbps की इंटरनेट स्पीड, अपडेटेड विंडोज और पर्याप्त रैम वाले सिस्टम अनिवार्य कर दिए गए हैं. साथ ही, स्कूलों को 13 फरवरी 2026 तक अपने सभी योग्य शिक्षकों का डेटा OASIS पोर्टल पर अपडेट करना होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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