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अब छात्रों को इंदिरा गांधी के इमरजेंसी का पाठ पढ़ाएगी NCERT, स्कूल सिलेबस में होगा बड़ा बदलाव

NCERT की नई किताब में कक्षा 9 के छात्रों के लिए 1975 की इमरजेंसी को शामिल किया गया है. ‘Understanding Society: India and Beyond-Part 1’ नाम की इस किताब में भारतीय लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों पर विशेष फोकस रखा गया है.

NCERT, 1975 Emergency, Education

NCERT Emergency Chapter: देश के स्कूलों के सिलेबस में बड़ा बदलाव किया गया है. नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 9 के लिए सोशल साइंस की नई किताब जारी की है, जिसमें भारतीय इतिहास के एक बेहद अहम और संवेदनशील राजनीतिक दौर 1975 की इमरजेंसी को शामिल किया गया है.

‘Understanding Society: India and Beyond – Part 1’ नाम की इस किताब के जरिए पहली बार 9वीं कक्षा के छात्रों को इमरजेंसी के पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी जाएगी. अब तक यह विषय आमतौर पर उच्च कक्षाओं या आगे की पढ़ाई में पढ़ाया जाता था, लेकिन अब इसे शुरुआती स्तर पर ही शामिल कर दिया गया है.

छात्रों को समझाया जाएगा लोकतंत्र का महत्व

नई किताब में इमरजेंसी को भारतीय लोकतंत्र का एक चुनौतीपूर्ण और विवादास्पद दौर बताया गया है. छात्रों को आसान भाषा में समझाया जाएगा कि इमरजेंसी क्या होती है, किन परिस्थितियों में इसे लागू किया जाता है और इसका नागरिक अधिकारों पर क्या असर पड़ता है. इस अध्याय का उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि एक लोकतांत्रिक देश में संविधान, न्यायपालिका और मौलिक अधिकारों की क्या भूमिका होती है.

पृष्ठभूमि और राजनीतिक घटनाक्रम भी शामिल

किताब में सिर्फ इमरजेंसी की घोषणा ही नहीं बल्कि उसके पीछे की पूरी राजनीतिक पृष्ठभूमि को भी विस्तार से बताया गया है. इसमें जयप्रकाश नारायण (जेपी) के नेतृत्व में चला आंदोलन, देश में बढ़ती महंगाई, राजनीतिक अस्थिरता और विपक्ष के आंदोलनों का जिक्र किया गया है.

इसके अलावा उस समय का एक अहम कानूनी घटनाक्रम भी शामिल है इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध ठहराया गया था. इस फैसले को उस समय की राजनीतिक स्थिति में बड़ा मोड़ माना जाता है.

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21 महीने बाद लोकतंत्र की वापसी

किताब के अंतिम हिस्से में इमरजेंसी के खत्म होने और लोकतंत्र की बहाली को भी विस्तार से बताया गया है. इसमें लिखा गया है कि करीब 21 महीने बाद जनवरी 1977 में चुनावों की घोषणा की गई और मार्च 1977 में इमरजेंसी को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया गया. इसके जरिए छात्रों को यह भी समझाया जाएगा कि किस तरह देश की जनता ने चुनाव के जरिए लोकतंत्र को फिर से मजबूत किया और एक नई राजनीतिक दिशा तय की.

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-भारत एक्सप्रेस



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