Bharat Express DD Free Dish

संस्कृत सप्ताह समारोह 2026: दिल्ली में 17 स्‍कूलों के होनहारों ने मनमोहक प्र‍स्‍तुतियों से बांधा समां, प्रो. डॉ. रचना समेत कई हस्तियां सम्मानित

SANSKRIT SAPTAH SAMAROH 2026: दिल्ली के मानसरोवर गार्डन स्थित सनातन धर्म मंदिर में 23 अगस्त से चल रहे ‘संस्कृत सप्ताह समारोह 2026’ का रविवार (30 अगस्त) को भव्य समापन हुआ. समारोह में 17 स्कूलों के करीब 200 विद्यार्थियों ने नृत्य, गायन, योग और नाटकों के जरिए संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति का संदेश दिया.

Sanskrit Saptah Samaroh 2026 Delhi
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

नई दिल्ली, आदित्य द्विवेदी: संस्कृत न केवल भारत की प्राचीनतम और समृद्ध भाषाओं में से एक है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को जड़ों से मजबूत करने वाली एक अटूट कड़ी भी है. इसी पावन विरासत और ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘संस्कृत सप्ताह समारोह 2026’ का रविवार को अत्यंत गरिमामय और सांस्कृतिक माहौल में समापन हो गया.

23 अगस्त से शुरू हुए इस आठ दिवसीय समारोह का आयोजन संस्कृत भारती दिल्ली प्रांत के बाल केंद्र तथा बलदेव जी एक सहारा फाउंडेशन (रमेश नगर) के संयुक्त तत्वावधान में मानसरोवर गार्डन स्थित सनातन धर्म मंदिर में किया गया. प्रोफेसर डॉ. रचना ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ कराया.

एक श्लोकीय रामायण और दीप प्रज्वलन से शुभारंभ

समारोह के समापन अवसर पर मुख्य मंच की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की वंदना के साथ हुई. इसके तुरंत बाद विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ‘एक श्लोकीय संपूर्ण रामायण’ की संगीतमय प्रस्तुति ने सभागार में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.

समारोह में दिल्ली-एनसीआर के 17 प्रमुख विद्यालयों से आए लगभग 200 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जबकि 20 स्कूलों के प्रधानाचार्य और 100 से अधिक गणमान्य नागरिक इस सांस्कृतिक यात्रा के साक्षी बने.

DPS आरके पुरम के विद्यार्थियों का शानदार प्रदर्शन

समारोह में दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) आरके पुरम के छात्र-छात्राओं का प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा. स्कूल के बाल कलाकार साद्यंत कौशल ने तबले की थाप पर संस्कृत गीत प्रस्तुत कर समां बांधा. इसके साथ ही विद्यार्थियों ने ‘मम माता देवता’ की भावपूर्ण प्रस्तुति दी. वहीं, डीपीएस की छात्राओं ने विद्या के महत्व को दर्शाने वाला एक सुंदर संस्कृत लघु नाटक पेश किया.

कार्यक्रम के दौरान डीपीएस आरके पुरम की संस्कृत अध्यापिका रुपाली जी ने कहा कि संस्कृत भाषा से जुड़ने पर बच्चों में स्वाभाविक रूप से नैतिक संस्कार और अनुशासन देखने को मिलते हैं. एक बार भाषा की बुनियादी समझ बन जाने के बाद बच्चे इसमें काफी गहरी रुचि दिखाने लगते हैं.

इस दौरान उपस्थित अभिभावकों – जिनमें नंदिनी कौशिक की माता जननी कौशिक और अवनी अग्रवाल की माता हीना अग्रवाल शामिल थीं – ने भी अपने विचार साझा किए. उन्होंने बताया कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी समृद्ध सनातन परंपराओं से गर्व के साथ जुड़ते हैं.

योग, शिव तांडव और देशभक्ति का अद्भुत संगम

संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ मंच पर भारतीय शास्त्रीय नृत्य और योग की भी मनमोहक झलक देखने को मिली:

गणेश वंदना: महाराजा अग्रसेन विद्यालय (अशोक नगर) की छात्राओं ने मनमोहक गणेश वंदना नृत्य प्रस्तुत किया.

शिव तांडव व कथक: शिवालय योगासना संस्था के साधकों ने ‘शिव तांडव’ का प्रदर्शन किया, जबकि कथक अकादमी के बाल कलाकारों ने ‘नमामि शमीशान निर्वाण रूपम’ पर शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी.

देशभक्ति रंग: जय भारतीय नृत्य नाटिका और ललित महाजन विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा दी गई ‘वंदे मातरम’ की ओजस्वी प्रस्तुति ने पूरे प्रांगण को देशभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया. इसके अलावा रश्मि जोशी की टीम ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए.

प्रोफेसर डॉ. रचना समेत गणमान्य हस्तियां सम्मानित

संस्कृत भाषा, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए समारोह में प्रोफेसर डॉ. रचना (नोएडा स्थित JIIT से संबद्ध एवं प्रतिष्ठित विद्वान) को विशेष रूप से सम्मानित किया गया. उनके साथ ही समाज और शिक्षा जगत की कई अन्य प्रमुख हस्तियों को भी स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया.

अपने संबोधन में प्रो. डॉ. रचना ने संस्कृत के वैज्ञानिक और व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि हमारे विचारों और संस्कारों का परिष्कार करने वाला माध्यम है.

संस्कृत का निरंतर विस्तार होता रहेगा: जयदेव वीर

कार्यक्रम के संयोजक और संस्कृत भारती दिल्ली के प्रांत बाल केंद्र प्रमुख जयदेव वीर ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी के मन से संस्कृत के प्रति भय को खत्म कर इसमें उनकी रुचि जगाना है. उन्होंने कहा कि डीपीएस आरके पुरम सहित अन्य सभी 17 स्कूलों के बच्चों ने जिस उत्साह से भाग लिया है, उससे यह स्पष्ट है कि संस्कृत भाषा का निरंतर विस्तार होता रहेगा.

समारोह के अंत में भाग लेने वाले सभी बाल कलाकारों को उनकी प्रतिभा के प्रोत्साहन हेतु प्रशस्ति पत्र (प्रमाण पत्र) और स्मृति चिह्न प्रदान किए गए.

यह भी पढ़िए: ज्ञान विज्ञान की बात : प्रो. (डॉ.) रचना की Dr. Sanjay Manchanda से Exclusive बातचीत



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read

Latest