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“युवा जागे, राष्ट्र आगे”: पंच परिवर्तन के संकल्प से विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ा मुस्लिम युवा सम्मेलन

शिक्षा, संस्कार, समरसता और स्वावलंबन का संदेश; डॉ. इन्द्रेश कुमार ने युवाओं को बनाया राष्ट्र निर्माण का अग्रदूत, मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान। देशभर से आए विद्यार्थियों, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और युवा प्रतिनिधियों ने इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

नई दिल्ली, 7 जून 2026: मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) के छात्र एवं युवा प्रकोष्ठ द्वारा आज कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली के स्पीकर हॉल में “मुस्लिम छात्र एवं युवा सम्मेलन” का आयोजन किया गया। “पंच परिवर्तन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में छात्र एवं युवाओं की सहभागिता” विषय पर आधारित इस सम्मेलन ने देश के युवाओं, खासकर मुस्लिम समुदाय के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने का एक सशक्त मंच प्रदान किया।

देशभर से आए विद्यार्थियों, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और युवा प्रतिनिधियों ने इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दोपहर 2:30 बजे हुआ।

पंच परिवर्तन: राष्ट्र जागरण का जनआंदोलन

सम्मेलन के मुख्य वक्ताओं ने कहा कि पंच परिवर्तन केवल एक अभियान नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला जनआंदोलन है। यह पहल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक राष्ट्रीय सामाजिक कार्य योजना के रूप में शुरू की गई है। इसके पांच प्रमुख आयाम हैं:

1.सामाजिक समरसता – समाज में भाईचारा और एकता को बढ़ावा देना

2. परिवार जागरण – पारिवारिक मूल्यों और जागरूकता को मजबूत करना।

3. स्वदेशी – स्थानीय उत्पादों के उपयोग और आत्मनिर्भरता पर बल।

4. पर्यावरण संरक्षण – पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना।

5. नागरिक कर्तव्य – एक जिम्मेदार नागरिक के कर्तव्यों का पालन करना।

वक्ताओं ने कहा कि ये पांच आयाम ही भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की मजबूत आधारशिला हैं।

डॉ. इन्द्रेश कुमार ने युवाओं को बताया भारत की सबसे बड़ी ताकत

सम्मेलन के मुख्य अतिथि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक, डॉ. इन्द्रेश कुमार ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल सरकारों के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने कहा, “विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी प्राप्त होगा जब देश का प्रत्येक नागरिक स्वयं को राष्ट्र निर्माण का सहभागी माने। पंच परिवर्तन युवाओं को सामाजिक समरसता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्यावरणीय जिम्मेदारी, आत्मनिर्भरता और सक्रिय नागरिकता का व्यावहारिक मार्ग प्रदान करता है।”

उन्होंने युवाओं से स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वच्छता ही विकसित भारत का प्रथम संस्कार है। डॉ. इन्द्रेश कुमार ने सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जिम्मेदार उपयोग पर भी बल दिया और युवाओं से आग्रह किया कि वे तकनीक का उपयोग सत्य, सद्भाव और राष्ट्र निर्माण के लिए करें। इससे पूर्व, बकरीद के अवसर पर उन्होंने मुसलमानों से गोहत्या से दूर रहने की अपील करते हुए कहा था कि हम सब पहले भारतीय हैं।

‘युवाओं का चरित्र और दायित्व तय करेगा भारत का भविष्य’: प्रो. शाहिद अख्त़र

सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) के कार्यकारी अध्यक्ष एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक, प्रो. शाहिद अख्त़र ने कहा कि भारत का भविष्य केवल आर्थिक विकास या तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि युवाओं के चरित्र, दृष्टि और जिम्मेदारी से तय होगा।

उन्होंने कहा, “धर्म, भाषा, जाति और क्षेत्र हमारी सामाजिक पहचान का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन हमारी सबसे बड़ी पहचान ‘भारतीय’ होना है। जब युवा स्वयं को राष्ट्र की प्रगति का भागीदार मानते हैं, तब वे स्वाभाविक रूप से जिम्मेदार, रचनात्मक और सकारात्मक बन जाते हैं।”

प्रो. अख्त़र ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र सेवा की भावना विकसित करना है। इससे पहले भी वह हैदराबाद के एक सेमिनार में “एक राष्ट्र, एक परिवार” की अवधारणा पर जोर दे चुके हैं।

शिक्षा का लक्ष्य केवल ज्ञान नहीं, चरित्र निर्माण भी

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित, जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज के प्राचार्य, प्रो. नरेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षण संस्थानों का दायित्व केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिकता, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करना भी है। उन्होंने कहा, “जब विद्यार्थी सम्मान, सहानुभूति और सेवा के मूल्यों को अपनाते हैं, तब वे राष्ट्र निर्माण के सच्चे सहभागी बनते हैं।”

राष्ट्रीय दायित्व और मानवता ही विकसित भारत की नींव

सम्मेलन में यह साझा विचार व्यक्त किया गया कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में नहीं, बल्कि उस विविधता को जोड़ने वाली मानवता में निहित है। वक्ताओं ने कहा कि हमें सबसे पहले स्वयं को इंसान और भारत का नागरिक मानना चाहिए। गिरीश जुयाल (संगठन संयोजक, MRM), डॉ. मोहम्मद शम्स इक़बाल (निदेशक, NCPUL) भी कार्यक्रम में वक्ता में शामिल रहे।

पंच परिवर्तन को जनआंदोलन बनाने का आह्वान

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के छात्र एवं युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक, डॉ. इमरान चौधरी ने कहा कि आज की सबसे बड़ी चुनौती पहचान नहीं, बल्कि उस पहचान को सकारात्मक रूप से जीना है। उन्होंने कहा, “कट्टरता विभाजन पैदा करती है, जबकि सच्चाई, शिक्षा और सेवा समाज को जोड़ती है। युवा यदि सत्य, सेवा और राष्ट्रीय दायित्व को अपनाएँ, तो पंच परिवर्तन एक जनआंदोलन बन सकता है।”

मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान और सामूहिक संकल्प

सम्मेलन के दौरान इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। अतिथियों द्वारा विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र एवं पदक प्रदान किए गए।

सम्मेलन का समापन पंच परिवर्तन के मूल्यों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी को बढ़ावा देने, नागरिक कर्तव्यों के पालन तथा पारिवारिक मूल्यों के संवर्धन का संकल्प लिया।

सम्मेलन में उपस्थित युवाओं ने बताया कि इस आयोजन ने उन्हें राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को समझने और एक सशक्त, प्रगतिशील और समावेशी राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के आयोजकों, विशेषकर डॉ. इमरान चौधरी और उनकी पूरी टीम ने इस सार्थक आयोजन को सफल बनाने के लिए सराहना प्राप्त की।

——भारत एक्सप्रेस



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