Bihar Election: विधानसभा चुनाव की तारीखें तय हो चुकी है. 6 और 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे और 14 नवंबर को नतीजे आएंगे. लेकिन चुनावी बिगुल बजने के बावजूद NDA और महागठबंधन दोनों में सीटों के बंटवारे को लेकर जबरदस्त खींचतान चल रही है. हर पार्टी अपनी हिस्सेदारी को लेकर अड़ी है और यही वजह है कि अब तक कोई ठोस फॉर्मूला सामने आया है.
BJP-RJD को सहयोगी क्यों जरूरी?
एनडीए में बीजेपी के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जदयू (JDU), चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास), जीतन राम मांझी की हम(एस), और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम शामिल हैं. वहीं महागठबंधन में राजद, कांग्रेस, वाम दलों के साथ इस बार मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी भी है जो उपमुख्यमंत्री पद की दावेदारी कर रही है.
जातीय समीकरणों के चलते हर पार्टी की अपनी पकड़ है. कोई दलित वोट बैंक पर मजबूत है तो कोई पिछड़े वर्ग में. ऐसे में कोई भी गठबंधन इन नेताओं को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहता है.
चिराग पासवान की सीटों की मांग से एनडीए में खलबली
लोजपा (रामविलास) ने 30 सीटों की मांग की थी जबकि बीजेपी 22 से ज्यादा देने को तैयार नहीं थी. अब खबर है कि समझौता लगभग हो गया है और चिराग की पार्टी को 25-26 सीटें मिल सकती हैं. बीजेपी एक राज्यसभा और एक विधान परिषद सीट देने की बात भी कर रही है. चिराग ने पहले 45 सीटों की मांग कर दी थी जिससे बातचीत अटक गई थी. उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने भी माहौल गर्म कर दिया था.
मांझी ने दिनकर की कविता से जताई नाराजगी
HAM प्रमुख जीतन राम मांझी ने बीजेपी को दुर्योधन बताते हुए रश्मिरथी की पंक्तियां साझा कीं थी. उन्होंने महाभारत के पांच गांवों की जगह 15 गांवों की मांग कर दी. उनका लक्ष्य पार्टी को मान्यता दिलाना है जिसके लिए कम से कम आठ सीटें जीतना जरूरी है. बीजेपी ने उन्हें 10 सीटों की पेशकश की है लेकिन मांझी इससे संतुष्ट नहीं हैं.
कुशवाहा की मांग से भी बीजेपी असहज
आरएलएम (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के पास कोई विधायक नहीं है फिर भी वे सात सीटों की मांग कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने शनिवार को कहा कि बातचीत अभी पूरी नहीं हुई है और असंतोष की खबरें गलत हैं. बीजेपी को उनकी मांगों से थोड़ी परेशानी जरूर है.
महागठबंधन में सहनी की सख्ती से तेजस्वी की मुश्किलें
वीआईपी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी 20 सीटों की मांग पर अड़े हैं जबकि राजद (RJD), कांग्रेस और वाम दल 12-15 सीटें देने को तैयार हैं. पिछली बार भी सहनी ने सीटों की संख्या से नाराज होकर महागठबंधन छोड़ दिया था. इस बार फिर वही स्थिति बनती दिख रही है. तेजस्वी यादव के साथ देर रात बैठक हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.
राजद और कांग्रेस के बीच भी तनाव है. कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो वह 13 अक्टूबर से अपने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर देगी.
बिहार चुनाव में सीटों का गणित बेहद पेचीदा हो गया है. हर नेता अपनी ताकत दिखा रहा है और गठबंधन की मजबूरी बनता जा रहा है. अब देखना होगा कि अगले कुछ दिनों में कौन-सा फॉर्मूला सामने आता है और कौन-कौन सीटों की लड़ाई में जीत हासिल करता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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