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क्रांतिकारियों की धरती पर लहराया भगवा, श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना साकार, आज मिली असली श्रद्धांजलि

West Bengal BJP Victory: बंगाल में बीजेपी की यह बढ़त एक लंबे इंतजार और सतत राजनीतिक विस्तार की कहानी का नतीजा है. पार्टी की वैचारिक जड़ें राज्य से जुड़ी रही हैं. इसके संस्थापक नेताओं में शुमार श्यामा प्रसाद मुखर्जी यहीं से आते थे.

West Bengal BJP Victory

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West Bengal BJP Victory: पश्चिम बंगाल की सियासत में बदलाव आकार लेता दिख रहा है. मतगणना के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी निर्णायक बढ़त बनाती नजर आ रही है. अगर ये रुझान नतीजों में तब्दील होते हैं, तो यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की दशकों पुरानी राजनीतिक धुरी के बदलने का संकेत होगा. बंगाल में बीजेपी की यह बढ़त एक लंबे इंतजार और सतत राजनीतिक विस्तार की कहानी का नतीजा है. पार्टी की वैचारिक जड़ें राज्य से जुड़ी रही हैं. इसके संस्थापक नेताओं में शुमार श्यामा प्रसाद मुखर्जी यहीं से आते थे. इसके बावजूद आजादी के बाद से लेकर अब तक बीजेपी को कभी ऐसा अवसर नहीं मिला, जब वह अपने दम पर बंगाल की सत्ता तक पहुंच सके.

यहां लंबे समय तक वामपंथी दलों का वर्चस्व रहा, जिसके बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने पिछले 15 सालों से राज्य की राजनीति पर पकड़ बनाए रखी. तो सवाल ये उठता है कि जिस बंगाल से बीजेपी के वैचारिक गुरु आते हैं. उस जगह से जहां पहली बार जंनसंघ का संसदीय चुनावों में खाता खुला था, वहां बीजेपी इतने सालों तक कमजोर क्यों रही और आखिर श्यामा प्रसाद मुखर्जी कौन थे, बंगाल में जीत दर्ज कर बीजेपी ने कैसे उनके सपनों को साकार किया?

श्याम प्रसाद मुखर्जी की धरा

श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था. उनके पिता आशुतोष मुखर्जी प्रसिद्ध शिक्षाविद थे. अपनी पढ़ाई पूरा करने के बाद वो कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा वाइस चांसलर के तौर पर काम किया. इस दौरान वो राजनीति में सक्रिय रहे.

मुखर्जी अध्यापन कार्य के दौरान राजनीति में भी काफी सक्रियता से काम करते रहे. वो हिंदू महासभा के अध्यक्ष के तौर पर भी काम किए. इसके बाद बंगाल विधानसभा में मंत्री और उसके बाद नेहरू सरकार में मंत्री बन गए.

आजादी मिलने के बाद कश्मीर के मामले को लेकर नेहरू से श्यामा प्रसाद मुखर्जी के मतभेद हो गए. श्यामा प्रसाद ने आर्टिकल 370 का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि जब पूरा भारत एक है तो फिर कश्मीर को स्पेशल स्टेटस देना देश की एकता के साथ विश्वासघात है. इसके विरोध में उन्होंने नेहरू मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में पूर्ण एकीकरण की मांग करते हुए ‘एक देश, एक विधान, एक निशान, एक प्रधान’ का नारा दिया.

भारतीय जनसंघ की स्थापना

श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद साल 1951 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए और RSS की मदद से दिल्ली में भारतीय जनसंघ की स्थापना की. वो इसके पहले अध्यक्ष बने. यहीं जनसंघ बाद में भारतीय जनता पार्टी बनी. इसलिए बीजेपी उन्हें अपना संस्थापक मानती है.

बंगाल में श्यामा प्रसाद की विरासत

साल 1947 में देश के विभाजन के समय श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंगाल के हिंदू हितों की रक्षा के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यहां तक दावा किया जाता है कि कांग्रेस पूरे बंगाल को पूर्वी पाकिस्तान बनाना चाहती थी, लेकिन वहां श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे जिन्होंने इसका कड़ा विरोध किया, जिसका परिणाम ये हुआ कि अंतत: पश्चिम बंगाल को भारत का ही हिस्सा बनाया गया. गृह मंत्री अमित शाह से लेकर बीजेपी के नेता आज भी अक्सर यह कहते हैं कि, अगर आज बंगाल भारत में है तो इसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जाता है.

साल 1952 में जनसंघ की पहली संसदीय चुनावी सफलता भी पश्चिम बंगाल से आई थी. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कोलकाता साउथ से उस चुनाव में सफलता पाई थी.

बीजेपी का बंगाल में अबतक का सफर

भले ही जनसंघ को पहली बार सफलता पश्चिम बंगाल से मिली हो, लेकिन बीजेपी बंगाल में संगठनात्मक रूप से कमजोर ही रही. यह सिलसिला साल 2010 तक चलता रहा. बीजेपी लाख जतन करने के बावजूद पश्चिम बंगाल में अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं तैयार कर पा रही थी.

इसका कारण बीजेपी के इतिहास में दफ्न है. दरअसल जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की उस समय मौत हो गई, जब वो जनसंघ को खड़ा ही कर रहे थे. उनकी मौत ने बीजेपी को 70 सालों तक बंगाल की राजनीति से वनवास पर भेज दिया.

साल 2010 के बाद बीजेपी ने बंगाल में दोबारा से काम करना शुरू कर दिया. वहां पर आरएसएस ने जहां स्वयंसेवक बनाए वहीं बीजेपी ने उन्हें राजनीतिक पहचान देनी शुरू की. इसका असर साल 2019 के लोकसभा चुनाव में दिखाई दिया. जहां पहली बार बीजेपी ने संसदीय चुनावों में 18 सीटें जीती. इसके बाद साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और टीएमसी के बाद दूसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी.

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साकार हुआ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना

आज पश्चिम बंगाल में बीजेपी जीत की दहलीज पर खड़ी है. कभी लेफ्ट का गढ़ रहे और बाद में तृणमूल कांग्रेस का किला बनने वाले पश्चिम बंगाल में आज भगवा लहरा रहा है. बीजेपी और आरएसएस को हिंदुत्व की विचारधारा देने वाले बंगाल में आज बीजेपी जीत दर्ज करने जा रही है. यह सिर्फ बीजेपी के लिए एक जीत नहीं बल्कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को सच करने जैसा है.

-भारत एक्सप्रेस



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