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Dhurandhar The Revenge: भारतीय नेताओं की वो भूल…जिसने उजाड़ दिया R&AW का नेटवर्क, पाकिस्तान में खत्म हो गए एजेंट

Dhurandhar The Revenge: भारत के इतिहास में एक ऐसा नेता भी हुए जिन्होंने मूत्रपान की तारीफ से खुश होकर पाकिस्तानी जनरल को खुफिया जानकारी दे दी. जिसकी कीमत पाकिस्तान में मौजूद भारत के रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के एजेंटों ने चुकाई.

Dhurandhar The Revenge

Dhurandhar The Revenge (धुरंधर: द रिवेंज) फिल्म में एक भारतीय एजेंट को पाकिस्तान में जाकर भारत के दुश्मनों का सफाया करते दिखाया गया है. फिल्म में भारत के कई घटनाओं को दिखाया गया है. मसलन अतीफ अहमद का कैरेक्टर जो प्रयागराज के बाहुबली अतीक अहमद पर बेस्ड है. इस फिल्म में बताया गया है कि भारत के कई नेताओं ने देश के साथ गद्दारी कर पाकिस्तान में बैठे आतंकियों की मदद की थी.

धुरंधर फिल्म को कई मुद्दों पर आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ रहा है. कई आलोचक इस फिल्म को भारतीय जनता पार्टी का प्रोपेगेंडा बता रहे हैं.

फिल्म और उसकी कहानी अपनी जगह लेकिन आजाद भारत के इतिहास में एक ऐसा नेता भी हुए जिन्होंने मूत्रपान की तारीफ से खुश होकर पाकिस्तानी जनरल को खुफिया जानकारी दे दी. जिसकी कीमत पाकिस्तान में मौजूद भारत के रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के एजेंटों ने चुकाई.

साल 1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में इंदिरा गांधी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. उनके बाद भारत की सत्ता की बागडोर जनता पार्टी के मोरारजी देसाई के हाथ में आई और वो प्रधानमंत्री बने. वो R&AW (Research and Analysis Wing) को शक की निगाहों से देखते थे. देसाई का मानना था कि इमरजेंसी में R&AW (Research and Analysis Wing) ने इंदिरा के लिए आंख और कान का काम किया.

R&AW के बजट में कटौती

मोरारजी देसाई एक सख्त और पारदर्शी शासन के समर्थक थे. वो R&AW (Research and Analysis Wing) को गोपनीय हथियारशाला समझते थे और उसके क्रियाकलाप को सीमित करना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने R&AW के बजट में कटौती तक कर डाली.

इसी बीच R&AW के साइंस एंड टेक्नोलॉजी डीविजन की TECHINT (Technical Intelligence) ने पाकिस्तान में अपनी खुफिया ऑपरेशन के दौरान एक बहुत बड़ी जानकारी का पता लगाया. जिसमें उसने बताया कि पाकिस्तान गुप्त रूप से परमाणु बम बनाने के लिए यूरेनियम संवर्धन कर रहा है. R&AW की इस खुफिया रिपोर्ट ने देश की एजेंसियों से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक को टेंशन में डाल दिया.

मोरारजी देसाई और जिया उल हक कनेक्शन

उधर पाकिस्तान के तानाशाह जनरल जिया उल हक ने प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को हटाकर खुद पाकिस्तान का नेतृत्व कर रहे थे. वो भारत से तनाव नहीं लाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने भारत के साथ संबंध नॉर्मल करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया था. R&AW के वरिष्ठ अधिकारी रहे बी. रमन अपनी आत्मकथा ‘The Kaoboys of R&AW – Down Memory Lane’ में लिखते हैं कि जिया उल हक मोरारजी देसाई को निजी कॉल करते और इसी बहाने देसी चिकित्सा और मूत्रपान पर चर्चा करते थे.

मूत्रपान की चर्चा में खोल दिया भेद

मूत्रपान में यह चर्चा सबसे आम थी कि आखिर मूत्र सुबह में पीना चाहिये या दिन में कभी भी? यह विषय मोरारजी देसाई को बहुत अच्छा लगता था. इसी बीच उन्होंने बातों ही बातों में जिया उल हक को यह बता दिया कि,

भारत जान चुका है कि पाकिस्तान काहूटा में चोरी-छिपे परमाणु हथियार बना रहा है.

यह भारत के इतिहास में पहली बार था जब किसी प्रधानमंत्री ने अपने दुश्मन देश को सबसे बड़ा राज बताया हो.

अविवेकी नेता खुफिया पेशा के लिए जोखिम हैं

बी. रमन अपनी किताब में कहते हैं कि “अविवेकी राजनीतिक नेता खुफिया पेशे के लिए एक अपरिहार्य पेशागत जोखिम होते हैं.”

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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा कहते हैं कि, इस घटना के कुछ ही दिनों के बाद देश ने R&AW के कई एजेंटों को गंवा दिया. उनके साथ पाकिस्तान ने क्या किया, हमें नहीं पता. बाद में मोरारजी देसाई को पाकिस्तान ने ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ से नवाजा था.

-भारत एक्सप्रेस



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