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सरकार ने बताया दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ रातों-रात OTT से क्यों गायब हुई? सामने आई बैन के पीछे की वजह

पंजाब के संवेदनशील 1990 के दशक और मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर बनी दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को सरकार के आदेश पर ओटीटी से हटा दिया गया है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, मेकर्स ने सेंसर बोर्ड के कट्स से बचने के लिए ‘पंजाब 95’ का नाम बदलकर इसे बिना कट्स के अनकट वर्जन में रिलीज कर दिया था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई.

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Satluj Movie Controversy: अगर आप दिलजीत दोसांझ के फैन हैं तो पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर चल रहे इस नए विवाद से जरूर वाकिफ होंगे. दिलजीत की नई फिल्म ‘सतलुज’ को इंटरनेट से अचानक हटा दिए जाने को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है. हर कोई यह पूछ रहा है कि आखिर रिलीज के महज दो दिन बाद ही Zee5 प्लेटफॉर्म से इस फिल्म को क्यों हटा दिया गया? अब इस पूरे मामले पर सरकार की तरफ से सफाई सामने आई है जिसने इस कड़े फैसले के पीछे की पूरी कहानी साफ कर दी है.

क्या है फिल्म की कहानी और विवाद?

यह फिल्म पंजाब के 1990 के दशक के एक बेहद संवेदनशील दौर और मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक फिल्म की समीक्षा करने पर यह पाया गया कि इसके कुछ हिस्सों और दृश्यों का गलत इस्तेमाल भारत-विरोधी ताकतें देश का माहौल बिगाड़ने के लिए कर सकती हैं. सरकार का मानना है कि फिल्म के कुछ अनसेंसर्ड सीन सार्वजनिक व्यवस्था और पंजाब की शांति को प्रभावित कर सकते थे.

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों ने साफ किया है कि भले ही OTT कंटेंट के लिए सेंसर बोर्ड की हरी झंडी जरूरी नहीं होती लेकिन उन्हें ‘आईटी नियमावली 2021’ के नियमों का पालन करना ही पड़ता है. इसके तहत कोई भी प्लेटफॉर्म ऐसा कंटेंट नहीं दिखा सकता जो देश की संप्रभुता, अखंडता या सुरक्षा के लिए खतरा बने.

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चुपचाप OTT पर रिलीज करने का सच

इस पूरे विवाद के पीछे एक बड़ा तकनीकी पेंच भी है. दरअसल मेकर्स ने साल 2022 में इस फिल्म को ‘पंजाब 95’ के नाम से सिनेमाघरों में रिलीज करने के लिए सेंसर बोर्ड के पास भेजा था. उस वक्त सेंसर बोर्ड ने फिल्म में करीब 127 कट्स लगाने और नाम बदलने का आदेश दिया था. मेकर्स को यह मंजूर नहीं था इसलिए उन्होंने थियेटर रिलीज टाल दी.

सरकार के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि सेंसर बोर्ड के इन कट्स और नियमों से बचने के लिए मेकर्स ने एक नया रास्ता निकाला. उन्होंने फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ कर दिया और इसे बिना किसी कट के चुपचाप सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया. जैसे ही यह पूरा मामला सरकार के ध्यान में आया बिना देर किए तुरंत एक्शन लिया गया और फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटाने का आदेश जारी कर दिया गया.

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-भारत एक्सप्रेस



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