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‘कितने साल और?’, महिला आरक्षण बिल गिरने पर दिशा पाटनी की बहन खुशबू का छलका दर्द

दिशा पाटनी की बहन खुशबू पाटनी ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरने पर नाराजगी जताई है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा कि कब तक परिसीमन और जनगणना के नाम पर महिलाओं को उनके हक से वंचित रखा जाएगा.

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संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (131वां संविधान संशोधन विधेयक) के गिरने की गूंज अब बॉलीवुड और ग्लैमर जगत तक पहुंच गई है. लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण बिल के फेल होने पर जहां एक तरफ राजनीतिक घमासान मचा है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता और मशहूर हस्तियां भी अपनी नाराजगी जाहिर कर रही हैं. बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी की बहन और पूर्व आर्मी ऑफिसर खुशबू पाटनी ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

कितना और इंतजार?

खुशबू पाटनी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक बेहद भावुक और तीखी पोस्ट साझा की है. उन्होंने लिखा कि महिलाओं के हक की बात वर्षों से सुनी जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी शून्य है.

खुशबू ने सवाल उठाया, ‘कितना और इंतजार? कभी जनगणना ने रोका, कभी परिसीमन ने रोका, तो कभी किसी राजनीतिक बहस ने. आज तक महिला आरक्षण बिल लागू नहीं हो सका. सबको पता है कि 2026 में परिसीमन की रोक हट जाएगी, लेकिन फिर भी कोई ठोस समाधान नजर नहीं आ रहा.’

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उन्होंने आगे अपने मन का दर्द बयां करते हुए लिखा, ‘जब मैं पैदा हुई थी तब इस बिल के बारे में सुना था, आज भी सिर्फ सुन ही रही हूं. कहीं ऐसा न हो कि बुढ़ापे में भी मैं बस इंतजार ही करती रह जाऊं.’ उनकी ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और कई महिला संगठन उनकी बातों का समर्थन कर रहे हैं.

सेना से फिटनेस कोच तक का सफर

बता दें कि खुशबू पाटनी केवल दिशा पाटनी की बहन के रूप में ही नहीं पहचानी जातीं, बल्कि उनकी अपनी एक मजबूत पहचान है. वे भारतीय सेना में अधिकारी रह चुकी हैं और फिलहाल एक फिटनेस कोच के तौर पर काम कर रही हैं. वे अक्सर महिला सशक्तिकरण और आत्मरक्षा (Self Defense) के मुद्दों पर मुखर रहती हैं. हाल ही में वे रियलिटी शो ‘ट्राइबवर्स’ (Tribevars) में भी नजर आई हैं, जो जियो हॉटस्टार पर काफी चर्चा बटोर रहा है.

बिल क्यों गिरा?

17 अप्रैल को लोकसभा में हुए मतदान के दौरान इस विधेयक को 278 वोट मिले, जबकि इसके विरोध में 211 वोट पड़े. नियम के मुताबिक, संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है, जिससे यह बिल चूक गया. अब इस विफलता को लेकर बीजेपी ने देशव्यापी प्रदर्शन शुरू कर दिया है, वहीं खुशबू पाटनी जैसी आवाजें इस मुद्दे को एक सामाजिक बहस का रूप दे रही हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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