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Fact Check: क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ने बीजेपी का गमछा गले में डालकर की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस? इस दावे की सच्चाई आई सामने

बिहार मतदाता सूची विवाद और राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी. इस दौरान सोशल मीडिया पर CEC ज्ञानेश कुमार की बीजेपी शॉल वाली तस्वीर खूब वायरल हो रही है. ऐसे में चलिए जानते हैं क्या है इसकी सच्चाई.

Fact Check

Fact Check: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी विवाद और राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. आयोग ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए गलत ठहराया.

सोशल मीडिया पर वायरल फेक तस्वीर

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार कथित तौर पर बीजेपी के चुनाव चिन्ह वाले शॉल में नजर आ रहे हैं. जब इस तस्वीर की जांच की गई तो यह तस्वीर फेक और एडिटेड पाई गई, जिसे दुष्प्रचार के मकसद से शेयर किया गया.

असल प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या हुआ?

17 अगस्त को नई दिल्ली के राष्ट्रीय मीडिया सेंटर में चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ अन्य चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी मौजूद थे. सभी औपचारिक वेशभूषा में थे और किसी भी तरह का पार्टी-प्रतीक शॉल उन्होंने नहीं पहना था. करीब डेढ़ घंटे चली इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्ञानेश कुमार ने साफ कहा “चुनाव आयोग के लिए न तो कोई पक्ष है और न ही विपक्ष, सब हमारे लिए समान हैं.”

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ज्ञानेश कुमार ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर दिया जवाब

उन्होंने ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि PPT प्रेजेंटेशन में दिखाया गया डेटा चुनाव आयोग का नहीं है. आरोप लगाने वालों को सात दिन में हलफनामा देना चाहिए, वरना इन आरोपों को निराधार माना जाएगा.

राहुल गांधी के आरोप और सियासी संदर्भ

7 अगस्त को राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया था कि “वोट चोरी हो रहे हैं और आयोग भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है.” इस बयान के बाद से ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई. प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार मधुरेंद्र कुमार ने भी इस बात की पुष्टि की कि वायरल तस्वीर पूरी तरह से फेक है. इसे जानबूझकर एडिट कर सोशल मीडिया पर फैलाया गया है.

क्या है वायरल तस्वीर की सच्चाई?

वायरल तस्वीर फेक और एडिटेड है. असल प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य अधिकारी औपचारिक वेशभूषा में थे. चुनाव आयोग ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों को खारिज कर साफ किया कि संस्था पूरी तरह निष्पक्ष है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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