सुप्रीम कोर्ट द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों पर रोक लगाए जाने के बाद सोशल मीडिया इससे जुड़े वीडियोज की बाढ़ आ गई है. इसी बीच सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से का एक बयान तेजी से वायरल हो रहा है. वायरल पोस्ट से दावा किया जा रहा है कि सीएम योगी ने कहा है कि UGC के नए नियमों का विरोध वही लोग कर रहे हैं जो जातिवाद और भेदभाव करते हैं, जो ऐसा नहीं करते उन्हें डरने की जरूरत नहीं है. लेकिन इस पोस्ट की सच्चाई कुछ और ही है. आइए जानते है.
क्या है वायरल दावा?
फेसबुक के एक यूजर ने 6 फरवरी 2026 को एक पोस्ट शेयर की, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से यह बयान लिखा गया था. पोस्ट में UGC नियमों के विरोध को जातिवाद से जोड़ते हुए सीएम योगी की कथित टिप्पणी बताई गई. इस पोस्ट को हजारों लोग देख और शेयर कर चुके हैं. साथ ही कई अन्य यूजर इसे आगे शेयर कर रहे हैं.
पड़ताल में सच आया सामने?
वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए संबंधित कीवर्ड्स के जरिए गूगल सर्च किया गया, लेकिन किसी भी भरोसेमंद मीडिया संस्थान की रिपोर्ट में ऐसा कोई बयान नहीं मिला. अगर मुख्यमंत्री ने वाकई ऐसा कुछ कहा होता, तो यह बयान किसी न किसी प्रमुख समाचार माध्यम में जरूर सामने आता.
इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स एक्स, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म्स की भी जांच की गई, लेकिन वहां भी इस तरह का कोई बयान नहीं मिला.
वायरल पोस्ट में प्रतिष्ठित न्यूज ऑर्गनाइजेशन का लोगो लगा हुआ था. इसलिए हमने उस ऑर्गनाइजेशन के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज भी खंगाले. जांच में पता चला कि असली ग्राफिक 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के मौके पर पोस्ट किया गया था, जिसमें सीएम योगी ने सिर्फ इतना कहा था कि “संविधान से ऊपर कोई भी नहीं.” उसी ग्राफिक को एडिट कर गलत बयान जोड़कर वायरल कर दिया गया.
इस जांच से ये बात साफ हो गई है की वायरल हो रहा पोस्ट फर्जी है और सीएम योगी ने ऐसा कोई भी बयान नहीं दिया है. इसलिए ऐसे किसी भी पोस्ट और वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी जांच जरूर करें
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-भारत एक्सप्रेस
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