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क्या जयंत चौधरी ने कहा ‘मैंने जाट समाज का ठेका लिया है क्या?’ जानिए वायरल पोस्टर का सच

सोशल मीडिया पर जयंत चौधरी के नाम से वायरल हो रहा पोस्टर फर्जी है. उन्होंने जाट समाज या मृत किसानों पर ऐसा कोई बयान नहीं दिया है, नवभारत टाइम्स का पोस्टर एडिट किया गया है.

Fake Viral Statement Of RLD Chief Jayant Chaudhary Bharat Express

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन सोशल मीडिया पर दावों की राजनीति अभी से गरमाने लगी है. सभी पार्टियों की तैयारी के बीच इन दिनों राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी के नाम से एक कथित बयान का पोस्टर इंटरनेट पर तेजी से शेयर किया जा रहा है. इसमें जयंत चौधरी के हवाले से दावा किया गया है कि उन्होंने कहा है कि मैंने क्या ठेका लिया है जाट समाज का जो 700 जाट किसान मरे?

लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और ही है.

क्या है असल सच्चाई

वायरल हो रहे इस दावे की जांच करने पर इसका असल सच सामने आया. यह पोस्टर एकक प्रतिष्ठित न्यूज संस्था के एक पुराने पोस्टर को एडिट करके यह ग्राफिक तैयार किया गया है.

असल में उस न्यूज संस्था ने 31 अगस्त 2026 को जयंत चौधरी का एक बयान शेयर किया था, जिसमें लिखा था, ‘अब शांत रहने का वक्त नहीं, कुछ चीजें बर्दाश्त के बाहर होती हैं.’ बस इसी असली पोस्टकार्ड से छेड़छाड़ करके फर्जी बयान चिपका दिया गया.

दावे वाले पोस्टकार्ड के वायरल होते ही न्यूज संस्था ने 10 सितंबर 2026 को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से बयान जारी कर साफ किया कि सोशल मीडिया पर उनके नाम से फर्जी और भ्रामक पोस्टर फैलाए जा रहे हैं.

वहीं, राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने भी 9 सितंबर 2026 को ट्वीट कर इस बयान का खंडन किया. पार्टी ने कहा कि जयंत चौधरी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है और फेक न्यूज फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है.

पुराने बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश

जांच के दौरान मिला कि साल 2019 में शामली में एक चुनावी बातचीत के दौरान जयंत चौधरी ने कहा था कि वे सिर्फ जाटों की नहीं, बल्कि किसान और मजदूर समाज की बात करते हैं और राजनीति का ठेका नहीं लेते. वहीं, 700 किसानों की मौत का संदर्भ 2020-21 के किसान आंदोलन से जुड़ा है. शरारती तत्वों ने पुराने संदर्भों को गलत तरीके से जोड़कर राजनीतिक भ्रम फैलाने की नीयत से यह फेक पोस्टर बनाया.

इस जांच से यह साफ है कि वायरल पोस्टकार्ड में किया जा रहा दावा पूरी तरह से झूठा और भ्रामक है.

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-भाारत एक्सप्रेस



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