अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जेफरी एपस्टीन केस से जुड़ी लाखों फाइलों और तस्वीरों को सार्वजनिक किए जाने के बाद, सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की कुछ ‘अजीब’ तस्वीरें वायरल हो रही हैं. इन तस्वीरों में दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी और राहुल गांधी को बदनाम यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ देखा गया है. लेकिन क्या वाकई इन तस्वीरों में कोई सच्चाई है? आइए जानते है.
क्या है वायरल तस्वीरों का पूरा सच?
सोशल मीडिया पर, खासकर इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर) पर कुछ यूजर्स इन तस्वीरों को शेयर करते हुए सनसनी फैला रहे हैं. एक पोस्ट में लिखा गया है कि “इसी डर से मोदीजी अमेरिका के खिलाफ नहीं बोलते,” वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी की भी ऐसी ही एक फोटो शेयर कर इसे ‘एपस्टीन फाइल्स’ का हिस्सा बताया जा रहा है.

तस्वीरों को पहली नजर में देखने पर ही कई सवाल खड़े होते हैं. मोदीजी वाली फोटो में बैकग्राउंड किसी लाइब्रेरी जैसा दिखता है, जबकि उसी फ्रेम में एपस्टीन वाली साइड का नजारा किसी पार्क जैसा है. एक ही फोटो में दो अलग-अलग बैकग्राउंड का होना ही इसकी असलियत पर शक पैदा करता है.
पड़ताल
जब हमने इन तस्वीरों की जांच शुरू की, तो सबसे पहले गूगल पर ऐसी किसी भी मुलाकात या रिकॉर्ड की तलाश की. जैसा कि उम्मीद थी, ऐसी कोई न्यूज रिपोर्ट कहीं मौजूद नहीं थी. अगर देश के प्रधानमंत्री या विपक्ष के नेता की ऐसी कोई फोटो असली दस्तावेजों में होती, तो पूरी दुनिया के मीडिया में हाहाकार मच गया होता.
सच्चाई जानने के लिए हमने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया. जब वायरल तस्वीरों को ‘Hugging Face’ और ‘Decopy’ जैसे एआई डिटेक्शन टूल्स पर डाला गया, तो नतीजे चौंकाने वाले थे. इन टूल्स ने 100% संभावना जताई कि ये तस्वीरें असली नहीं हैं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाई गई हैं. राहुल गांधी की तस्वीर की जांच में भी यही बात सामने आई कि वह पूरी तरह से डिजिटल रूप से निर्मित है. गूगल डीपमाइंड के Synth ID टूल ने भी कन्फर्म किया कि इन तस्वीरों का हकीकत से कोई वास्ता नहीं है.
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-भारत एक्सप्रेस
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