Photo Credit- Social Media viral Post
हाल ही में 5 अगस्त को कुख्यात गैंगस्टर सतीश मराठा का गुजरात के सुरत में हत्या कर दी गई थी. इसी मामले से जुड़ा एक दावा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इंटरनेट पर पोस्ट और वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि सतीश मराठे कोई गैंगस्टर नहीं बल्कि एक समाजिक कार्यकार्ता थे. लेकिन असल सच्चाई कुछ और ही है.
क्या है सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा?
दरअसल, सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि सूरत में एक सामाजिक कार्यकर्ता की मुस्लिम युवकों ने हत्या कर दी.
वायरल पोस्ट में लिखा गया कि गुजरात के सूरत में सामाजिक कार्यकता सतीश मराठे युवक की मुस्लिम युवकों ने झुग्गी के पास ले जाकर दर्दनाक हत्या कर दी और फरसा से काट डाला.
क्या है सच्चाई?
पुलिस रिपोर्ट और आधिकारिक बयानों के अनुसार, सतीश मराठे कोई सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि खुद एक गैंगस्टर थे. उनकी हत्या के पीछे किसी तरह का सांप्रदायिक विवाद नहीं, बल्कि आपसी रंजिश और गैंगवार मुख्य वजह थी.
मामले की जांच में सामने आया है कि इस पूरी वारदात का मुख्य साजिशकर्ता राहुल मंडल उर्फ राहुल ‘अपार्टमेंट’ है. राहुल मंडल ने लाजपोर सेंट्रल जेल में बंद रहने के दौरान अपने गैंग के एक साथी पर हुए हमले का बदला लेने के लिए सतीश मराठे की हत्या का पूरा प्लान तैयार किया था. आरोपी ने अपना गुनाह भी कबूल कर लिया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए वयस्कों के नाम केतन सिरसाथ (19), राहुल दुबे (20), करण दुबे (20), अजीत गोस्वामी (25), आकाश ठाकुर (18) और राहुल कपूरे (29) हैं. इसके अलावा वारदात में शामिल 4 नाबालिगों को भी जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश कर रिमांड होम भेजा गया है. आरोपियों के नामों से ही स्पष्ट है कि इसमें किसी प्रकार का सांप्रदायिक एंगल नहीं है.
निष्कर्ष
इस जांच से यह साफ है कि सूरत में सतीश मराठे की हत्या गैंगवार और पुरानी दुश्मनी का नतीजा थी. इसे सोशल मीडिया पर झूठे सांप्रदायिक दावों के साथ जोड़कर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है, जो पूरी तरह बेबुनियाद है.
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-भारत एक्सप्रेस
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