सेहत के लिहाज से चीनी को अक्सर सेहत की दुश्मन के नजर से देखा जाता है. लेकिन क्या वाकई हर तरह की मिठास बुरी है? और सबसे बड़ा सवाल यह कि आखिर हमें दिन भर में कितनी चीनी खानी चाहिए ताकि स्वाद भी बना रहे और सेहत भी ना बिगड़े?
चलिए समझते हैं कि चीनी का गणित आखिर क्या है और इसे अपनी डाइट में कैसे मैनेज करें.
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि शुगर हर उस चीज में होती है जिसमें कार्बोहाइड्रेट है. फल, सब्जियां, अनाज और दूध इन सबमें कुदरती चीनी मौजूद होती है.
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इन चीजों से मिलने वाली मिठास खतरनाक नहीं है, क्योंकि इनके साथ आपको फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम और ढेर सारे विटामिन्स भी मिलते हैं. असली समस्या शुरू होती है ‘प्रोसेस्ड शुगर’ यानी ऊपर से डाली जाने वाली सफेद चीनी से, जिसे हम चाय, कोल्ड ड्रिंक या मिठाई के जरिए लेते हैं.
कैसे जानें अपनी कैलोरी?
एक बेहद आसान फॉर्मूला है जिससे आप खुद जान सकते हैं कि आपके शरीर को कितनी कैलोरी चाहिए और उसमें चीनी का कितना हिस्सा होना चाहिए.
कैलोरी निकालने का तरीका:
- अपनी लंबाई (सेंटीमीटर में) नापें.
- उसमें से 100 घटा दें.
- जो नंबर आए, उसे 20 से गुणा (multiply) कर दें.
उदाहरण के लिए, अगर आपकी लंबाई 170 सेमी है, तो 170 में से 100 घटाने पर 70 बचेगा. अब 70 को 20 से गुणा करने पर जवाब आएगा 1400. यानी आपको दिन भर में करीब 1400 कैलोरी की जरूरत है. आपकी कुल कैलोरी का 5 से 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा चीनी से नहीं आना चाहिए. ऊपर दिए उदाहरण के हिसाब से 1400 का 10% हुआ 140 कैलोरी. यानी आपको दिन भर में 140 कैलोरी से ज्यादा चीनी नहीं लेनी है.
चम्मच के हिसाब से समझें हिसाब-किताब
अब आप सोच रहे होंगे कि 140 कैलोरी मतलब कितनी चीनी? इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए:
- 1 ग्राम चीनी = 4 कैलोरी
- 1 छोटी चम्मच (5 ग्राम) = 20 कैलोरी
- 1 बड़ी चम्मच (15 ग्राम) = 60 कैलोरी
अगर आपकी लिमिट 140 कैलोरी है, तो इसका मतलब है कि आप दिन भर में लगभग 7 छोटी चम्मच चीनी ले सकते हैं. लेकिन ध्यान रहे, इसमें वह चीनी भी शामिल है जो बिस्किट, ब्रेड या केचप जैसे पैकेट बंद सामानों में छिपी होती है.
क्यों खतरनाक है खाली कैलोरी?
प्रोसेस्ड शुगर को ‘ब्लैंक’ या खाली कैलोरी कहा जाता है. इसका मतलब है कि यह शरीर को तुरंत एनर्जी तो देती है, लेकिन इसमें पोषण के नाम पर जीरो विटामिन या मिनरल होते हैं. जब हम ज्यादा चीनी खाते हैं, तो यह सीधे हमारे वजन को बढ़ाती है, इंसुलिन के सिस्टम को बिगाड़ती है और आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज और दिल की बीमारियों का रास्ता खोल देती है.
नोट: अगर आप पहले से ही डायबिटीज, पीसीओएस (PCOS) या मोटापे से जूझ रहे हैं, तो यह सामान्य फॉर्मूला आप पर लागू नहीं होगा. ऐसी स्थिति में अपनी डाइट तय करने के लिए डॉक्टर या एक्सपर्ट डाइटिशियन की सलाह लेना ही सबसे बेहतर है.
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