International Yoga Day 2025: आज 21 जून 2025 ( Yoga Divas 2025) को भारत समेत पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है. हम योग से तन मन को स्वस्थ रखना चाह रहे हैं, लेकिन प्लास्टिक का प्रयोग कम नहीं कर रहे. आपके घर में मौजूद प्लास्टिक की बोतलें, खाने के डिब्बे, रैपर्स और यहां तक कि आपकी पानी की बोतल — ये सब जितने सामान्य लगते हैं, उतने ही घातक साबित हो रहे हैं. आइए बताते हैं कैसे?
हाल ही आई एक नई रिपोर्ट के मुताबिक हर 30 सेकंड में दुनिया में एक व्यक्ति की मौत का कारण प्लास्टिक से जुड़ी बीमारियां बन रही हैं.
संयुक्त राष्ट्र और कई मेडिकल संस्थानों की रिपोर्ट बताती है कि हर साल लाखों मौतें प्लास्टिक के कारण होती है. प्रति वर्ष लगभग 22 लाख लोग ऐसे रोगों से मर रहे हैं जिनका संबंध प्लास्टिक प्रदूषण से है. बेहद आम सी दिखने वाली प्लास्टिक वाली मौत का ये डरावना आंकड़ा है.
दरअसल, ये आंकड़े बताते हैं कि हर 30 सेकंड में एक जान सिर्फ इसलिए जा रही है क्योंकि हमने प्लास्टिक को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है. अगर हम आगे भी नहीं संभले तो आगे और गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.
आइए आपको बताते हैं प्लास्टिक से फैलने वाले प्रमुख रोग कौन से हैं?
कैंसर: खासकर ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. बीपीए (BPA) जैसे रसायन, जो प्लास्टिक में पाए जाते हैं, हार्मोन को प्रभावित करते हैं.
फेफड़ों की बीमारी (अस्थमा और COPD): माइक्रोप्लास्टिक जब हवा में घुलता है, तो यह फेफड़ों में जाकर सूजन और संक्रमण पैदा करता है.
हृदय रोग: प्लास्टिक से निकलने वाले रसायन ब्लड प्रेशर और हृदय धमनियों को नुकसान पहुंचाते हैं।
हार्मोनल इंबैलेंस: प्लास्टिक में मौजूद फ्थेलेट्स (Phthalates) और BPA शरीर की हार्मोन प्रणाली को बिगाड़ते हैं, जिससे प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है.
न्यूरोलॉजिकल समस्याएं: बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर खास असर पड़ता है — विकास में बाधा और मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों का खतरा.
माइक्रोप्लास्टिक है अदृश्य ज़हर
आपको बता दें कि हालिया स्टडीज़ में ये बात सामने आई है कि एक आम व्यक्ति हर हफ्ते औसतन 5 ग्राम माइक्रोप्लास्टिक निगल रहा है. यानी लगभग एक क्रेडिट कार्ड के बराबर. ये माइक्रोप्लास्टिक्स का अदृश्य ज़हर हमारे खून, लिवर, यहां तक कि प्लेसेंटा में भी पाए जा चुके हैं.
पर्यावरण ही नहीं, स्वास्थ्य भी खतरे में
कुल लोगों का मानना है कि आमतौर पर प्लास्टिक प्रदूषण को पर्यावरणीय संकट होता है. लेकिन ऐसा नहीं है. अब ये मानव स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा संकट बन चुका है. इसलिए UNEP (United Nations Environment Programme) ने प्लास्टिक को “धीमा ज़हर” करार दिया है।
इससे आखिर कैसे बचें?
इससे बचने के लिए आप सिंगल यूज़ प्लास्टिक का त्याग करें. साथ ही स्टील, कांच और कपड़े के विकल्प अपनाएं, प्लास्टिक में गर्म चीज़ें न रखें, फिल्टर्ड पानी पीएं — माइक्रोप्लास्टिक हटाने वाले फिल्टर का इस्तेमाल करें.
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