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Mental Health Insurance: अस्पताल में भर्ती तक सीमित न रहे बीमा, थेरेपी और काउंसलिंग कवरेज की मांग

Mental Health Insurance: भारत में मानसिक स्वास्थ्य बीमा को लेकर विशेषज्ञों ने थेरेपी, काउंसलिंग और नियमित फॉलो-अप को पर्याप्त कवरेज में शामिल करने की जरूरत बताई है. मौजूदा पॉलिसियों में ओपीडी इलाज, वेटिंग पीरियड और कवरेज लिमिट को लेकर अंतर है, जिससे मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ बढ़ सकता है.

Mental Health Insurance India

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Mental Health Insurance: भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन इलाज की लागत अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.खासतौर पर थेरेपी, मनोचिकित्सक से सलाह और नियमित फॉलो-अप का खर्च कई लोगों को अपनी जेब से उठाना पड़ता है.विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य बीमा को केवल अस्पताल में भर्ती होने तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है.मानसिक स्वास्थ्य की कई समस्याओं का इलाज ओपीडी, काउंसलिंग और नियमित थेरेपी के जरिए किया जाता है.

थेरेपी और काउंसलिंग को मिले पर्याप्त कवरेज

विशेषज्ञों के मुताबिक, डिप्रेशन, एंग्जायटी, तनाव और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में मरीजों को लंबे समय तक विशेषज्ञ की निगरानी और कई थेरेपी सेशन की जरूरत पड़ सकती है.ऐसे में सिर्फ अस्पताल में भर्ती होने पर मिलने वाला कवरेज मरीजों के वास्तविक खर्च को पूरा नहीं करता.बीमा पॉलिसियों में मनोचिकित्सक से परामर्श, काउंसलिंग और फॉलो-अप के लिए स्पष्ट और पर्याप्त सीमा तय करने की जरूरत है.

ओपीडी इलाज में अब भी बड़ा अंतर

एक अध्ययन में 30 बीमा कंपनियों की 235 पॉलिसियों का विश्लेषण किया गया.इसमें मानसिक बीमारी के कवरेज और ओपीडी सुविधाओं में पॉलिसी-दर-पॉलिसी काफी अंतर पाया गया.कुछ योजनाओं में वेटिंग पीरियड और कवरेज की सीमाएं भी थीं.इससे मरीजों के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि उनकी पॉलिसी वास्तव में किस तरह का मानसिक स्वास्थ्य उपचार कवर करती है.

कानून में प्रावधान, लेकिन अमल अहम

मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 के तहत मानसिक बीमारी के इलाज के लिए स्वास्थ्य बीमा कवरेज को शारीरिक बीमारी के इलाज के समान आधार पर उपलब्ध कराने का प्रावधान है.सरकार ने फरवरी 2026 में राज्यसभा में बताया कि कई बीमा उत्पादों में थेरेपी, काउंसलिंग, मनोचिकित्सकीय परामर्श, ओपीडी और ई-काउंसलिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं.हालांकि, वास्तविक कवरेज संबंधित पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करता है.

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समय पर इलाज के लिए जरूरी है बेहतर बीमा

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य बीमा को मरीज-केंद्रित बनाने की जरूरत है.इसमें अस्पताल में भर्ती होने के साथ-साथ थेरेपी सेशन, मनोचिकित्सक की सलाह, मानसिक स्वास्थ्य जांच और नियमित फॉलो-अप को पर्याप्त कवरेज मिलना चाहिए.इससे लोग आर्थिक चिंता के बिना समय पर इलाज ले सकेंगे और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के गंभीर होने से पहले मदद प्राप्त कर सकेंगे.

भारत एक्सप्रेस



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