Sickness : दिल्ली में इस बार मानसून के बाद बीमारियों का प्रकोप तेज़ी से बढ़ गया है. राजधानी में बुखार से पीड़ित लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस वर्ष मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले पिछले छह वर्षों के मुकाबले सबसे अधिक दर्ज किए गए हैं. वहीं डेंगू का खतरा भी अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.
बारिश के बाद मौसम में नमी बनी रहने और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बना हुआ है, जिससे इन बीमारियों का प्रसार तेज़ी से हो रहा है.
आंकड़ों में दर्ज चिंता (Sickness)
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम और दिल्ली नगर निगम द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, 29 सितंबर तक राजधानी में मलेरिया के 371, डेंगू के 759 और चिकनगुनिया के 61 मामले दर्ज किए गए हैं.
पिछले वर्ष इसी अवधि में मलेरिया के केवल 237 और चिकनगुनिया के 42 मामले सामने आए थे. इससे साफ है कि इस बार संक्रमण की दर पिछले साल के मुकाबले कहीं अधिक है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ हफ्तों में ठंडक समय पर नहीं आई तो यह संख्या और बढ़ सकती है.
लापरवाही बनी बीमारी का कारण
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली के कई इलाकों में जलभराव, नालों की सफाई में लापरवाही और घरों में जमा पानी इस बढ़ते संक्रमण का मुख्य कारण है.
बरसात के बाद शहर के अनेक हिस्सों में जगह-जगह पानी भर गया, जो मच्छरों के प्रजनन के लिए उपयुक्त स्थल बन गया.
विशेष रूप से पुराने और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सफाई व्यवस्था कमजोर रही है. वहीं, कई नागरिक स्वयं भी एहतियात नहीं बरत रहे हैं गमलों, टायरों और कूलरों में पानी जमा रहने दे रहे हैं.
प्रशासन ने तेज की कार्रवाई
बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर बड़े स्तर पर अभियान शुरू किए हैं.(Sickness)
घर-घर सर्वेक्षण: अब तक लाखों घरों का निरीक्षण किया जा चुका है.
छिड़काव अभियान: सभी वार्डों में मच्छरनाशी दवाओं का छिड़काव नियमित रूप से कराया जा रहा है.
प्राकृतिक नियंत्रण: पानी के स्थलों पर मच्छरों को खाने वाली मछलियाँ छोड़ी जा रही हैं.
जुर्माने की कार्रवाई: जहां-जहां निरीक्षण के दौरान पानी जमा पाया गया, वहां संबंधित मकान मालिकों और संस्थानों पर जुर्माना लगाया गया है.
जनजागरूकता: विद्यालयों, बाजारों और आवासीय क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने के लिए जागरूक किया जा रहा है.
प्रशासन ने कहा है कि यदि नागरिक स्वयं सतर्क रहें और आसपास साफ-सफाई रखें तो संक्रमण को रोका जा सकता है.
डॉक्टरों की सलाह (Sickness)
राजधानी के प्रमुख चिकित्सकों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के बुखार या कमजोरी को हल्के में न लें.
यदि किसी को बुखार के साथ कंपकंपी, थकान, सिर दर्द, शरीर में दर्द या भूख में कमी जैसी शिकायत हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें और आवश्यक रक्त जांच कराएं.
डॉक्टरों ने कहा है कि इन दिनों स्वयं उपचार करने से बचें क्योंकि मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के लक्षण शुरुआती दिनों में सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखते हैं, लेकिन समय रहते उपचार न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है.
रोकथाम के उपाय (Sickness)
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन बीमारियों से बचाव का सबसे अच्छा तरीका मच्छरों से बचना है. घर के भीतर और आसपास पानी जमा न होने दें. कूलर, गमले, और टंकी का पानी सप्ताह में कम से कम एक बार अवश्य बदलें.
सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें.
बच्चों और बुजुर्गों को पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाएं. खिड़की और दरवाजों पर जाल लगाएं ताकि मच्छर घर में प्रवेश न कर सकें.
विशेषज्ञों का विश्लेषण (Sickness)
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में हर साल बरसात के बाद इस प्रकार की बीमारियाँ बढ़ती हैं, लेकिन इस बार स्थिति अधिक गंभीर इसलिए बनी क्योंकि मानसून अपेक्षाकृत लंबा खिंच गया और तापमान में देर से गिरावट आई.
साथ ही, कई इलाकों में सफाई व्यवस्था सुचारु नहीं रही और नागरिकों में भी लापरवाही देखी गई.
अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह संक्रमण आने वाले महीनों में और अधिक फैल सकता है.
स्वास्थ्य विभाग की अपील
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के बुखार या कमजोरी को नज़रअंदाज न करें.
प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह अपने घर और आसपास का वातावरण स्वच्छ रखे तथा मच्छरों के प्रजनन को रोकने में योगदान दे.
विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में मौसम के अनुकूल बने रहने पर मलेरिया और डेंगू के मामलों में और बढ़ोतरी संभव है. इसलिए सामूहिक सतर्कता और सहयोग ही इस संकट से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है.
दिल्ली में मानसून के बाद संक्रमणों का यह बढ़ता प्रकोप केवल स्वास्थ्य विभाग या नगर निगम की चिंता नहीं, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी का विषय है.
सरकार चाहे जितने अभियान चलाए, जब तक लोग स्वयं जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक स्थिति में स्थायी सुधार संभव नहीं.
अतः आवश्यक है कि लोग साफ-सफाई का ध्यान रखें, पानी जमा न होने दें, और किसी भी बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें.
सामूहिक जागरूकता और अनुशासन से ही राजधानी को इस बढ़ते खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है.
भारत एक्सप्रेस
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