Abhishek Banerjee ED Summons
Abhishek Banerjee ED Summons: टीएमसी में टूट से परेशान ममता बनर्जी के लिए मुसीबतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. अब ईडी ने सांसद अभिषेक बनर्जी को शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में 15 जून को पूछताछ के लिए तलब किया है.
इसी संदर्भ में ईडी अधिकारियों की एक टीम कोलकाता के कालीघाट रोड पर मौजूद अभिषेक बनर्जी के आवास पर गई और उनके स्टाफ को समन सौंप दिया. बताया जा रहा है कि उस समय अभिषेक बनर्जी आवास पर मौजूद नहीं थे.
डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी को 15 जून को साल्ट लेक स्थित ईडी के सीजीओ कॉम्प्लेक्स कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है.
कई टीएमसी नेताओं के ठिकानों पर हो चुकी है छापेमारी
ईडी साल 2022 से इस मामले की जांच कर रही है. जांच के दौरान एजेंसी कई टीएमसी नेताओं और उनसे जुड़े ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है. इस मामले में पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी समेत कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था.
जांच एजेंसियों का मानना है कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुईं. आरोप है कि फर्जी नियुक्तियां की गईं, मेरिट सूची में हेरफेर हुआ और बिचौलियों के जरिए अवैध तरीके से नौकरियां दिलाई गईं. ईडी इस मामले में कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध कमाई के पहलुओं की जांच कर रही है, जबकि सीबीआई मामले के अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है.
अभिषेक बनर्जी की कंपनी की भूमिका की भी हो रही जांच
सूत्रों के मुताबिक, ईडी अभिषेक बनर्जी से जुड़ी कंपनी ‘लीप्स एंड बाउंड्स प्राइवेट लिमिटेड’ की भूमिका की भी जांच कर रही है. एजेंसी को जांच के दौरान कुछ संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के संकेत मिले हैं, जिनकी पड़ताल की जा रही है. इसी सिलसिले में ईडी कंपनी के परिसरों पर छापेमारी कर चुकी है और कुछ संपत्तियां भी अटैच की गई हैं.
हालांकि, अभिषेक बनर्जी ने सभी आरोपों को खारिज किया है और किसी भी तरह की अनियमितता में शामिल होने से इनकार किया है.
ये भी पढ़ें- 5 दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचीं वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज, दिल्ली में हुआ जोरदार स्वागत
इस बीच, अभिषेक बनर्जी के परिवार और उनकी कंपनी को कलकत्ता हाई कोर्ट से अस्थायी राहत मिली है. कोलकाता नगर निगम (केएमसी) की ओर से कथित अवैध निर्माण को लेकर जारी नोटिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पाया कि नोटिस में कई प्रक्रियागत कमियां थीं. जस्टिस स्मिता दास डे की पीठ ने कहा कि नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि संपत्ति का कौन-सा हिस्सा कथित रूप से अवैध है. इसके बाद अदालत ने नगर निगम को नया और स्पष्ट नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

