भारत का विंड एनर्जी सेक्टर अब बड़े टर्बाइन की ओर तेजी से बढ़ रहा है. डेवलपर्स सीमित जमीन से ज्यादा बिजली निकालने की कोशिश में हैं. इसी दिशा में अडानी विंड ने गुजरात के मुंद्रा में 5 मेगावाट का प्रोटोटाइप चालू किया है.
सबसे बड़ा रोटर डायमीटर
इस टर्बाइन में 91.2 मीटर का ब्लेड और 185 मीटर का रोटर डायमीटर है. यह भारत के सबसे बड़े रोटर डायमीटर वाले टर्बाइनों में से एक है. 26,600 वर्ग मीटर के स्वेप्ट एरिया के साथ यह मशीन कम से मध्यम हवा में भी ज्यादा बिजली पैदा करने के लिए डिजाइन की गई है.
सेक्टर में बड़ा बदलाव
बड़े टर्बाइन का इस्तेमाल इस सेक्टर में स्ट्रक्चरल बदलाव को दिखाता है. ज्यादा कैपेसिटी वाली मशीनें हर इंस्टॉलेशन से अधिक बिजली देती हैं, जिससे प्रोजेक्ट की लागत कम होती है और जमीन का बेहतर इस्तेमाल होता है.
ALMM में शामिल होने की तैयारी
अडानी विंड के चार मॉडल पहले से ही MNRE की अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स (ALMM) में हैं. आने वाले महीनों में नए 5 MW मॉडल का सर्टिफिकेशन और ALMM में शामिल होने की उम्मीद है.
भारत का बढ़ता मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम
MNRE की ताजा लिस्ट के मुताबिक भारत में 15 अप्रूव्ड विंड टर्बाइन मैन्युफैक्चरर हैं. भारत की घरेलू कैपेसिटी 2022 में 12 GW से बढ़कर 20 GW हो गई है. इससे भारत ग्लोबल क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन में एक अहम हब बन रहा है.
ग्लोबल परिदृश्य
ब्लूमबर्गNEF के आंकड़े बताते हैं कि 2025 में ग्लोबल विंड इंस्टॉलेशन रिकॉर्ड 169 GW तक पहुंच गए. चीन अभी भी सबसे बड़ा खिलाड़ी है, लेकिन भारत चीन के बाहर सबसे बड़ा मार्केट बनकर उभरा है. अडानी विंड को ग्लोबल टॉप 15 में जगह मिली है.
भारत की स्थिति
भारत कुल इंस्टॉल्ड विंड कैपेसिटी में दुनिया में चौथे स्थान पर है. यहां लगभग 55 GW ऑपरेशनल है और तकनीकी क्षमता 1,100 GW से ज्यादा आंकी गई है. अगर 2030 तक सालाना इंस्टॉलेशन 15 GW तक पहुंचते हैं तो भारत ग्लोबल मांग का 10% हिस्सा बन सकता है.
टेक्नोलॉजी और सहयोग
5 MW प्लेटफॉर्म को अडानी विंड की इंजीनियरिंग टीम और जर्मनी की विंडटूएनर्जी ने मिलकर तैयार किया है. इसमें भारत की स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से फीचर्स जोड़े गए हैं.
भविष्य की योजना
अडानी विंड ने 10 GW के लॉन्ग-टर्म टारगेट के साथ सालाना कैपेसिटी को 2.25 GW से 5 GW तक बढ़ाने का प्लान बनाया है. कंपनी यूरोप को ब्लेड एक्सपोर्ट कर रही है और US, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील व साउथ-ईस्ट एशिया में भी बातचीत चल रही है.
नई दिशा
ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और रिसाइकिल होने वाले मटीरियल पर फोकस के साथ भारत का विंड सेक्टर ग्लोबल बेंचमार्क से जुड़ रहा है. मुंद्रा में 5 MW प्रोटोटाइप की कमीशनिंग इस बदलाव का संकेत है.
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-भारत एक्सप्रेस
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