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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी में जाली दस्तावेज रोकने के लिए विवाह पंजीकरण नियम 2017 संशोधित करने के दिए आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जाली दस्तावेजों से होने वाली शादियों और मानव तस्करी, यौन शोषण जैसी घटनाओं को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियम 2017 में संशोधन करने के लिए छह महीने का समय दिया है.

Allahabad High Court

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जाली दस्तावेजों के जरिए शादी कराने वाले गिरोह पर और घर से भागकर शादी के बाद मानव तस्करी, यौन शोषण और जबरन श्रम जैसे मामलों पर लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियम 2017 को संशोधित करने के निर्देश दिए हैं और इसके लिए छह महीने का समय निर्धारित किया है.

कोर्ट ने कहा कि विवाह की वैधता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए नियम में संशोधन करने की आवश्यकता है. कोर्ट ने कहा कि सत्यापन योग्य विवाह पंजीकरण तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है.

यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने शनिदेव व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है. कोर्ट ने यह आदेश जाली दस्तावेजों के जरिए शादी कराने वाले संगठित गिरोह का खुलासा होने पर दिया है. कोर्ट के समक्ष घर से भागकर शादी करने वाले करीब 125 अलग अलग मामलों की सुनवाई के दौरान कई विसंगतियां आईं.

घर से भागकर शादी करने वाले मामलों में विसंगतियों का खुलासा

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि सुरक्षा के लिए अदालतों में विवाह के फर्जी प्रमाण पत्र दिए गए हैं. कोर्ट ने कहा कि गवाहों के रूप में नामित व्यक्ति के नाम भी काल्पनिक पाया गया. सुनवाई के दौरान पाया गया कि कई मामलों में तो वास्तव में विवाह हुआ ही नहीं था. विवाह प्रमाण पत्र जारी करने वाली संस्थाओं का कोई अता पता नहीं था.

कोर्ट ने कहा कि वयस्क होने पर निःसंदेह सभी को जीवन साथी चुनने का अधिकार है लेकिन इस अधिकार का प्रयोग वैधानिक प्रावधानों को दरकिनार करके नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि राज्य और उसके तंत्रों की जिम्मेदारी है कि वह कानून का सख्ती से पालन कराएं और विवाह संस्था की अखंडता व पवित्रता की रक्षा करें.

आगे कोर्ट ने कहा कि ऐसे विवाह के कई बार गंभीर परिणाम सामने आते हैं. भागकर शादी के बाद मानव तस्करी, यौन शोषण और जबरन श्रम जैसे मामले भी सामने आएं हैं. ऐसे में विवाह पंजीकरण अधिनियम में संशोधन जरूरी है.

फर्जी प्रमाण पत्र रोकने हेतु पुजारियों और संस्थाओं का विनियमन

कोर्ट ने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव को 2017 के विवाह पंजीकरण के नियम में संशोधन में कुछ सुझाव भी दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि विवाह के लिए धार्मिक रीतिरिवाज अनुष्ठान का खुलासा अनिवार्य किया जाए. विवाह अधिकारियों को आपत्तियां उठाने, संदेह के आधार पर आवेदन अस्वीकार करने और रिकॉर्ड बनाए रखने का अधिकार दिया जाए.

इसके अलावा फर्जी प्रमाण पत्रों को रोकने के लिए पुजारियों/संस्थाओं को विनियमित करने के लिए कानून बनाया जाए. विवाह कराने वाली संस्थाओं की जवाबदेही के लिए आयु और निवास प्रमाण की फोटोकॉपी रखना अनिवार्य किया जाए. फर्जी आयु दस्तावेज को रोकने के लिए पंजीकरण के साथ ऑनलाइन आयु सत्यापन प्रणाली बनाई जाए.

विवाह पंजीकरण के लिए वर वधु का आधार प्रमाणीकरण दोनों पक्षों और गवाहों का बायोमीट्रिक डाटा, फोटो, सीबीएसई, यूपी बोर्ड, पैन, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे आधिकारिक पोर्टल से आयु सत्यापन की जाए. ख़ासकर भागकर शादी करने वाले जोड़ो के वीडियो फोटो को भी विवाह पंजीकरण में शामिल किया जाए.

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-भारत एक्सप्रेस 



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